बिहान योजना का सहारा मिला तो मेहनत ने लिख दी सफलता की नई इबारत, आत्मनिर्भर बनकर परिवार की आर्थिक ताकत बनीं हामेश्वरी
CBN36 बिलासपुर। कहते हैं कि मेहनत के साथ सही अवसर मिल जाए तो किस्मत बदलते देर नहीं लगती। बिल्हा विकासखंड के ग्राम कछार की हामेश्वरी साहू ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। कभी परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करने वाली हामेश्वरी आज अपने खेतों में गेंदे के फूलों की खुशबू और सब्जियों की हरियाली के बीच आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। बिहान योजना से मिली आर्थिक सहायता को उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से कमाई का जरिया बना लिया। अब उनके खेतों में खिलने वाले फूल केवल खुशबू ही नहीं बिखेर रहे, बल्कि परिवार के जीवन में खुशहाली के रंग भी भर रहे हैं।
आर्थिक सहयोग मिला तो खुल गए तरक्की के रास्ते
ग्राम कछार निवासी हामेश्वरी साहू मां दुर्गा स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार के लिए ऋण सहायता मिली। उन्होंने इस राशि को घरेलू खर्चों में लगाने के बजाय आजीविका का स्थायी साधन तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाया। सब्जियों और गेंदे के फूलों की खेती शुरू की। शुरुआत में मेहनत और लगन के सहारे आगे बढ़ीं और धीरे-धीरे खेती उनकी आमदनी का महत्वपूर्ण जरिया बन गई। आज इसी खेती से होने वाली आय परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित हो रही है।
खेतों में खिलते फूलों के साथ खिल उठे सपने
हामेश्वरी के लिए गेंदे के फूलों की खेती केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मसम्मान की पहचान बन गई है। खेतों में लहलहाती सब्जियां और खिलते गेंदे के फूल उनकी मेहनत की कहानी बयां करते हैं। जिस आर्थिक मजबूती की कभी उन्हें जरूरत महसूस होती थी, आज उसी दिशा में वे अपने प्रयासों से आगे बढ़ रही हैं। खेती से मिलने वाली आमदनी ने न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति को सहारा दिया है, बल्कि उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का विश्वास भी दिलाया है।
अब परिवार की जिम्मेदारियों में निभा रहीं अहम भूमिका
हामेश्वरी बताती हैं कि बिहान योजना से मिली ऋण सहायता उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बनी। इस सहयोग से उन्हें खुद का काम शुरू करने का अवसर मिला। आज सब्जियों और फूलों की खेती से होने वाली आमदनी के कारण वे परिवार की जरूरतों को पूरा करने में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे भविष्य में और बेहतर करने की उम्मीद के साथ खेती में जुटी हुई हैं।
गांव की दूसरी महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
हामेश्वरी की सफलता इस बात की मिसाल है कि ग्रामीण महिलाओं को सही अवसर, आर्थिक सहयोग और प्रोत्साहन मिले तो वे अपनी मेहनत से परिवार की तकदीर बदल सकती हैं। स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाएं न केवल रोजगार के नए अवसर तलाश रही हैं, बल्कि आर्थिक रूप से मजबूत होकर समाज में अपनी अलग पहचान भी बना रही हैं।
हामेश्वरी की कहानी उन महिलाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद कुछ कर गुजरने का सपना देखती हैं। उन्होंने साबित किया है कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और निरंतर मेहनत से होती है।
हामेश्वरी साहू ने बिहान योजना से मिले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। आज उनके खेतों में खिलते गेंदे के फूल उनकी मेहनत, संघर्ष और सफलता की कहानी कह रहे हैं।
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