CBN36 बलौदाबाजार। सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर रूप से घायल लोगों को हादसे के बाद के शुरुआती एक घंटे यानी ‘गोल्डन आवर’ में बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पीएम राहत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में बुधवार को यातायात परिसर बलौदाबाजार में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त अनुविभाग स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला पुलिस अधीक्षक आईपीएस गौरव राय के निर्देश और उप पुलिस अधीक्षक यातायात संजय कुमार साहू के मार्गदर्शन में हुई।
कार्यशाला में उप पुलिस अधीक्षक यातायात संजय कुमार साहू और जिला डीआरएम (DRM) मनोज मांडले ने चिकित्सकों, पुलिस अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों को योजना की प्रक्रिया और तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।
सरकारी और निजी अस्पतालों में मिलेगा कैशलेस इलाज

अधिकारियों ने बताया कि सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को पीएम राहत योजना के तहत 1.50 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। यह सुविधा जिले के पंजीकृत शासकीय अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों में भी लागू है। इसका उद्देश्य आर्थिक या प्रशासनिक कारणों से इलाज में देरी को रोकना और समय पर उपचार सुनिश्चित करना है।
iRAD/e-DAR पोर्टल पर तत्काल दर्ज होगी दुर्घटना की जानकारी

जिला डीआरएम मनोज मांडले ने कार्यशाला में थाना प्रभारियों, विवेचकों और अस्पताल प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों को iRAD/e-DAR पोर्टल की प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दुर्घटना के बाद पोर्टल पर घटना की सटीक जानकारी तत्काल दर्ज की जानी है। अस्पताल में भर्ती घायल के इलाज के लिए प्राप्त ऑनलाइन रिक्वेस्ट का थाना स्तर पर विवेचक द्वारा तत्काल सत्यापन कर डिजिटल अप्रूवल देने पर भी विशेष जोर दिया गया।
पुलिस और अस्पताल प्रबंधन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर कागजी प्रक्रिया में होने वाली देरी को कम करने और घायल का इलाज तत्काल शुरू कराने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
कोतवाली, पलारी और करहीबाजार के अधिकारी रहे मौजूद
अनुविभाग स्तरीय कार्यशाला में थाना सिटी कोतवाली, थाना पलारी और चौकी करहीबाजार के विवेचक, सीसीटीएनएस आरक्षक तथा शासकीय और निजी अस्पतालों के TMS ऑपरेटर प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
अधिकारियों ने कहा कि दुर्घटना के बाद का शुरुआती एक घंटा घायल की जान बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पैसे या प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण किसी घायल के इलाज में देरी न हो। पुलिस और जिला प्रशासन ने नागरिकों से भी दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए आगे आने की अपील की है।
प्रधान संपादक




