CBN36 जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में जगदलपुर स्थित NIA स्पेशल कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ सुनवाई चली थी। इनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। शेष 10 आरोपियों के खिलाफ शनिवार को फैसला सुनाया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में 101 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए थे। 10 अगस्त को मामले में अंतिम बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। अभियोजन ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोप साबित होने की दलील दी थी, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों को चुनौती देते हुए अपने पक्ष में तर्क रखे थे।
कांग्रेस ने उठाए जांच पर सवाल
झीरम मामले में फैसला आने के बाद कांग्रेस ने जांच को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप रहा है कि मामले में केवल छोटे नक्सलियों को पकड़ा गया, जबकि कथित षड्यंत्रकारी अब भी बाहर हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी NIA की जांच पर सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना था कि मामले की जांच सही तरीके से नहीं की गई।
बघेल ने आरोप लगाया था कि दरभा थाने में दर्ज FIR में नामजद लोगों से NIA ने पूछताछ तक नहीं की। कांग्रेस लंबे समय से झीरम हमले के पीछे बड़े षड्यंत्र की जांच की मांग करती रही है।
25 मई 2013 को हुआ था हमला
NIA के रिकॉर्ड के मुताबिक, 25 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सलियों ने हमला किया था। इस हमले में कांग्रेस के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा विद्याचरण शुक्ल समेत कई वरिष्ठ नेताओं सहित 27 लोगों की मौत हुई थी। मृतकों में 10 पुलिसकर्मी भी शामिल थे। हमले में 38 लोग घायल हुए थे।
उस समय प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले थे। छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार थी और डॉ. रमन सिंह मुख्यमंत्री थे। कांग्रेस ने चुनाव से पहले प्रदेशभर में परिवर्तन यात्रा शुरू की थी। तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल की अगुवाई में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता अलग-अलग इलाकों में यात्रा कर रहे थे।
सुकमा की रैली से लौट रहा था कांग्रेस का काफिला
25 मई को सुकमा में परिवर्तन रैली आयोजित की गई थी। रैली खत्म होने के बाद कांग्रेस नेताओं का काफिला सुकमा से जगदलपुर की ओर रवाना हुआ। काफिले में करीब 25 गाड़ियां थीं और करीब 200 नेता-कार्यकर्ता मौजूद थे।
काफिले में सबसे आगे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा थे। इसके पीछे महेंद्र कर्मा और मलकीत सिंह गैंदू की गाड़ी चल रही थी। वहीं, बस्तर के कांग्रेस प्रभारी उदय मुदलियार भी काफिले में शामिल थे। यानी प्रदेश कांग्रेस की शीर्ष नेतृत्व टीम एक ही काफिले में मौजूद थी।
पेड़ गिराकर रोका रास्ता, फिर शुरू हुई अंधाधुंध फायरिंग
दोपहर करीब 3:40 बजे काफिला झीरम घाटी पहुंचा। यहां नक्सलियों ने सड़क पर पेड़ गिराकर रास्ता रोक दिया था। जैसे ही गाड़ियां रुकीं, घात लगाकर बैठे नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी।
बताया जाता है कि 200 से ज्यादा नक्सलियों ने करीब डेढ़ घंटे तक काफिले पर हमला किया। चश्मदीदों के मुताबिक, हमलावरों ने कुछ नेताओं को नाम लेकर पहचाना और उन्हें निशाना बनाया। हमले में IED का भी इस्तेमाल किया गया था।
हमले की पूरी योजना पहले से तैयार होने की बात सामने आई थी। नक्सलियों ने हमले के लिए स्थान का चयन, रास्ता रोकने, विस्फोटक लगाने और वारदात के बाद जंगल में भागने तक की तैयारी कर रखी थी।
12 साल बाद भी नदी में फंसा है वाहन का हिस्सा
झीरम घाटी हमले की भयावहता का एक निशान आज भी मौजूद है। हमले के दौरान IED विस्फोट में एक वाहन का हिस्सा उछलकर नदी में जा गिरा था। बताया जाता है कि 12 साल बाद भी वाहन का वह हिस्सा नदी में फंसा हुआ है।
ये 10 आरोपी ठहराए गए दोषी
NIA कोर्ट ने मामले में इन 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है-
- प्रमिला कोडियाम उर्फ ज्योति
- बंजामी उर्फ सन्ना
- अयाता मरकाम उर्फ अयाता माड़कम
- मुक्का मंडावी
- मड़कामी देवा
- कवासी कोसा
- चौतू उर्फ मुन्ना
- कोसा कवासी
- महादेव नाग
- सुमित्रा
बचाव पक्ष बोला- फैसले से संतुष्ट नहीं, हाईकोर्ट जाएंगे
दोषियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अरविंद चौधरी ने कहा कि वे कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।
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