
युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश का एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं : मुख्यमंत्री साय

63 उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार, चार को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार; 2026-27 के लिए 64 शिक्षकों के नाम घोषित
CBN36 रायपुर। शिक्षक दिवस के अवसर पर शनिवार को लोकभवन के छत्तीसगढ़ मंडपम में राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले प्रदेश के 63 शिक्षकों को राज्यपाल पुरस्कार से सम्मानित किया। चार शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया। वहीं स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने वर्ष 2026-27 के राज्य शिक्षक सम्मान के लिए चयनित 64 शिक्षकों के नामों की घोषणा की।
समारोह में राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में शिक्षकों और विद्यार्थियों का नई तकनीक से परिचित होना जरूरी है, लेकिन तकनीक के विवेकपूर्ण और जिम्मेदार इस्तेमाल की समझ उससे भी अधिक जरूरी है। AI हमारा सहायक बने, नियंत्रक नहीं। शिक्षक विद्यार्थियों को तकनीक का इस्तेमाल ज्ञान अर्जित करने, नवाचार करने और व्यक्तित्व विकास के लिए करने के लिए प्रेरित करें।
राज्यपाल ने कहा कि डिजिटल तकनीक के कारण आज सूचनाओं का विशाल संसार उपलब्ध है, लेकिन तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता स्वतंत्र चिंतन और बौद्धिक विकास को प्रभावित कर सकती है। तकनीक जानकारी दे सकती है, लेकिन संस्कार, संवेदना, अनुशासन और जीवन की सही दिशा शिक्षक ही दे सकते हैं। बदलते समय में शिक्षक की भूमिका इसलिए और महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 शिक्षा को व्यावहारिक, कौशल आधारित, बहुभाषी और विद्यार्थी केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। शिक्षकों को भी लगातार अपने ज्ञान और कौशल को अपडेट करना होगा। विद्यार्थियों की रुचि और प्रतिभा पहचानकर उन्हें सही विषय और करियर चुनने में मार्गदर्शन देना भी शिक्षक की जिम्मेदारी है।
युक्तियुक्तकरण के बाद एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं : साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि शिक्षक नई पीढ़ी और राष्ट्र के निर्माता हैं। शिक्षक सम्मान उनके समर्पण, मेहनत और विद्यार्थियों के भविष्य निर्माण के लिए किए गए उत्कृष्ट कार्यों का सम्मान है।
उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्रत्येक बच्चे को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है। युक्तियुक्तकरण के बाद प्रदेश में अब एक भी स्कूल शिक्षकविहीन नहीं है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शिक्षा को संस्कार, कौशल और रोजगार से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर में बच्चों को स्थानीय बोली में प्रारंभिक शिक्षा देने की पहल की गई है। प्रदेश के 341 विद्यालयों का चयन पीएम श्री योजना के तहत किया गया है। इन स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं और बेहतर शैक्षणिक वातावरण के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा स्वामी विवेकानंद के नाम पर 150 विद्यालय शुरू किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि बस्तर के दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए ओरछा और जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में शिक्षा और शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।
प्रदेश में AI आधारित स्मार्ट स्कूलों पर जोर
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि सरकार शिक्षा में आधुनिक तकनीक और नवाचार को बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में AI आधारित स्मार्ट स्कूल विकसित किए जा रहे हैं। विद्यार्थियों में संस्कार, रचनात्मकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के लिए भी विभिन्न गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है।

इन शिक्षकों को मिले स्मृति पुरस्कार
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई के राजेश कुमार प्रजापति को डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार, कोरबा के कामता प्रसाद जायसवाल को डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार, दुर्ग की प्रज्ञा सिंह को डॉ. मुकुटधर पांडेय स्मृति पुरस्कार और सारंगढ़-बिलाईगढ़ की प्रियंका गोस्वामी को गजानन माधव मुक्तिबोध स्मृति पुरस्कार प्रदान किया गया।
समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा, राज्यपाल के सचिव डॉ. सीआर प्रसन्ना, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, संचालक लोक शिक्षण ऋतुराज रघुवंशी समेत विभागीय अधिकारी और प्रदेशभर से आए शिक्षक-शिक्षिकाएं मौजूद रहे।
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