
सर्व आदिवासी समाज और महिला आयोग ने विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों पर दिए सुझाव
CBN36 रायपुर, 1 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का सर्वसमावेशी प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मंगलवार को राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में UCC समिति के समक्ष बस्तर से सरगुजा तक के सामाजिक प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव रखे। परिचर्चा में सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू और राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंध जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार रखे।
UCC समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार, सेवानिवृत्त अधिकारी श्रीमती ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्याम धावड़े ने प्रतिनिधियों की बात सुनी। समिति ने भरोसा दिलाया कि UCC का प्रारूप तैयार करते समय छत्तीसगढ़ की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, जनजातीय परंपराओं और सामाजिक ताने-बाने का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
आदिवासी रीति-रिवाजों के संरक्षण की मांग
कंवर, गोंड, बैगा और उरांव सहित विभिन्न जनजातियों के प्रतिनिधियों ने कहा कि आदिवासी समाज की सदियों पुरानी रूढ़िगत प्रथाओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विशिष्टताओं को प्रस्तावित कानून में संरक्षण मिलना चाहिए। प्रतिनिधियों ने विवाह पंजीयन, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर भी समिति के समक्ष अपनी राय रखी।
महिला अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा पर जोर
राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ सकारात्मक सामाजिक बदलावों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकार, राष्ट्रीय एकता को मजबूती देने और धर्म परिवर्तन पर रोक से जुड़े पहलुओं के संदर्भ में UCC की आवश्यकता को रेखांकित किया।

राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष मोना सेन ने छत्तीसगढ़ की लोक-कला और जनजातीय विरासत को संरक्षित रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि वैवाहिक और संपत्ति संबंधी अधिकारों में समानता से महिलाओं को कानूनी सुरक्षा और आत्मविश्वास मिलेगा।
अनुच्छेद 44 के तहत चल रहा जनसंवाद
संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत UCC समिति प्रदेशभर में व्यापक जनसंवाद कर रही है। समिति विवाह एवं तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार एवं विरासत तथा लिव-इन संबंधों से जुड़े सुझावों का अध्ययन कर रही है। इसके लिए जिला स्तरीय फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और प्रत्यक्ष बैठकों के माध्यम से आम नागरिकों, कानूनविदों और सामाजिक संगठनों से राय ली जा रही है।
समिति का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की सामाजिक और सांस्कृतिक विविधता को ध्यान में रखते हुए पारदर्शी, न्यायसंगत और जनहितैषी समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार करना है।
प्रधान संपादक




