अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 तक 37.07 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लंबित, 23 सितंबर को अगली सुनवाई
CBN36 बिलासपुर। अपराध पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए संचालित पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान पाया कि अप्रैल 2025 से जुलाई 2026 के बीच 1099 मामलों में 37 करोड़ सात लाख 42 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि लंबित है। राशि लंबित रहने की वजह फंड की उपलब्धता नहीं होना बताया गया।
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता कार्यालय के लॉ अफसर ने कोर्ट को बताया कि पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना, 2018 के तहत राशि के आवंटन और भुगतान के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। फंड उपलब्ध होते ही लंबित राशि जारी कर दी जाएगी।
सक्षम अधिकारी को देना होगा पूरा हिसाब
कोर्ट ने मामले की निगरानी जारी रखते हुए सक्षम अधिकारी को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। अधिकारी को बताना होगा कि 37.07 करोड़ रुपये की लंबित राशि जारी करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। इस दौरान कितनी राशि जारी हुई और कितने मामलों में पीड़ितों को मुआवजा दिया गया, इसका भी पूरा विवरण देना होगा।
साथ ही शेष राशि कब तक जारी कर पात्र पीड़ितों को भुगतान किया जाएगा, इसकी समयबद्ध कार्ययोजना भी शपथपत्र में प्रस्तुत करनी होगी।
86 करोड़ रुपये की हुई थी मांग
पिछली सुनवाई में राज्य सरकार ने बताया था कि योजना के लिए अलग बजट हेड बनाया गया है। 31 जनवरी 2026 के आदेश में कोर्ट को बताया गया था कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के अनुपूरक बजट में 20 करोड़ रुपये स्वीकृत कर जारी किए गए हैं।
15 अप्रैल 2026 की सुनवाई में राज्य की ओर से बताया गया कि साक्षी और पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 86 करोड़ रुपये की मांग की गई है। इसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 की करीब 33 करोड़ रुपये की बकाया राशि भी शामिल थी। गृह विभाग ने वित्त विभाग से तत्काल 50 करोड़ रुपये आवंटित करने की मांग की थी।
पहले भी करोड़ों रुपये थे लंबित
अक्टूबर 2025 की सुनवाई में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बताया गया था कि अगस्त 2025 तक करीब 31 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि लंबित थी। इससे पहले मार्च 2025 में 1585 स्वीकृत मामलों में मुआवजा वितरण के लिए 55 करोड़ 31 लाख 74 हजार रुपये की मांग की गई थी। इनमें से 40 करोड़ रुपये दो किस्तों में स्वीकृत कर जारी किए जा चुके थे।
बाद में 53 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट आवंटन का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजे जाने की जानकारी भी कोर्ट को दी गई थी।
मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी।
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