
छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या 18 से बढ़कर 35, तेंदूपत्ता संग्राहकों को 757 करोड़ का ऑनलाइन भुगतान
CBN36 रायपुर, 1 सितंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ‘हरित छत्तीसगढ़, समृद्ध छत्तीसगढ़’ के संकल्प के साथ वन संरक्षण और वनवासियों की आर्थिक समृद्धि को आगे बढ़ा रही है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने मंगलवार को नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में विभागीय गतिविधियों और उपलब्धियों की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार के लिए वन संरक्षण का मतलब केवल जंगल बचाना नहीं, बल्कि वनवासियों की समृद्धि, जनजातीय संस्कृति का संरक्षण, किसानों की आय बढ़ाना और महिलाओं-युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करना भी है।
किसानों की आय से जोड़ा पौधरोपण
कश्यप ने बताया कि किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत 5 एकड़ तक की भूमि पर 100 प्रतिशत तथा 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान दिया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में 36,896 हितग्राहियों की 62,441 एकड़ कृषि भूमि में 3.675 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं।
तेंदूपत्ता संग्राहकों को बड़ी राहत
छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता संग्रहण दर 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा है, जो देश में सर्वाधिक है। वर्ष 2025 में 11.44 लाख परिवारों ने 13.85 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहित किया। इसके लिए 757 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया गया। 7.14 लाख संग्राहकों को 153 करोड़ रुपये प्रोत्साहन पारिश्रमिक दिया गया। इसके अलावा 12.40 लाख महिला संग्राहकों को चरण पादुका वितरित की गई।
समर्थन मूल्य पर 36,580 क्विंटल वनोपज की खरीदी की गई, जिसके लिए 16.66 करोड़ रुपये का ऑनलाइन भुगतान किया गया। तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों के 8,533 विद्यार्थियों को 12.07 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई है।
बस्तर में विकास और रोजगार की नई राह
मंत्री ने कहा कि बस्तर के माओवादी प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था में सुधार के बाद वन विभाग अति-संवेदनशील इलाकों में भी वानिकी एवं विदोहन कार्य फिर शुरू कर रहा है। दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, बस्तर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर के दूरस्थ वन क्षेत्रों में इमारती लकड़ी और बांस विदोहन के कार्य प्रस्तावित हैं। इससे 21.67 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
वन्यजीव संरक्षण में बड़ी उपलब्धि
छत्तीसगढ़ में बाघों की संख्या वर्ष 2022 के 18 से बढ़कर वर्ष 2026 में 35 हो गई है। यह 94 प्रतिशत वृद्धि है। 2,829.387 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाला गुरु घासीदास-तमोर पिंगला देश का तीसरा सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है। बांधवगढ़ से तीन बाघों के ट्रांसलोकेशन की अनुमति भी मिल चुकी है।
बारनवापारा अभयारण्य में कृष्ण मृगों की संख्या 77 से बढ़कर 200 से अधिक हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 26 अप्रैल 2026 के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस उपलब्धि की सराहना की।
मानव-हाथी द्वंद्व पर तकनीक से निगरानी

मानव-हाथी द्वंद्व कम करने के लिए ‘गज संकेत’ ऐप और ‘गजरथ यात्रा’ के जरिए तकनीक एवं जनभागीदारी को जोड़ा गया है। प्रदेश में 90 हाथी मित्र दलों के 545 प्रशिक्षित सदस्य गांव-गांव जाकर जागरूकता का काम कर रहे हैं।
ईको टूरिज्म से स्थानीय रोजगार
राज्य में 240 प्राकृतिक पर्यटन केंद्र स्थापित किए गए हैं, जिनमें 50 से अधिक पूरी तरह स्वावलंबी हो चुके हैं। बस्तर का धुड़मारास सामुदायिक पर्यटन का उदाहरण बना है, जहां 40 प्रत्यक्ष और 20 अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित हुए हैं। कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान को वर्ष 2025 में यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया गया है।
कोपरा जलाशय बना प्रदेश का पहला रामसर साइट
बिलासपुर के कोपरा जलाशय को छत्तीसगढ़ का पहला रामसर साइट घोषित किया गया है। Vision@2047 के तहत वर्ष 2030 तक प्रदेश में 20 रामसर साइट बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
डिजिटल हुआ वन प्रशासन
वन विभाग की भुगतान प्रक्रिया को एंड-टू-एंड डिजिटल किया गया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,520 करोड़ रुपये से अधिक का ऑनलाइन भुगतान किया गया, जबकि 2026-27 में अगस्त तक 209 करोड़ रुपये का भुगतान हो चुका है। वनाग्नि निगरानी प्रणाली से रिस्पॉन्स टाइम 1-2 घंटे से घटकर 5-10 मिनट हो गया है।
मंत्री ने कहा कि वन संरक्षण, जनजातीय संस्कृति, रोजगार, वन्यजीव सुरक्षा और आधुनिक तकनीक को साथ लेकर छत्तीसगढ़ को हरित और समृद्ध बनाने की दिशा में सरकार लगातार काम कर रही है।
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