खाकी की हवाई उड़ान और मिली ये सजा
खाकी जो ना करे कम ही है। अब देखिए ना, साइबर फ्रॉड के मामले में पड़ोसी जिले के पुलिस अधिकारी व कर्मचारियों ने जो कुछ किया उससे बड़े अधिकारी का गुस्सा होना लाजिमी है। हुए भी और गुस्साए अफसर ने सीधे निलंबन की सजा सुना दी। पुलिस कर्मियों को रेल मार्ग के जरिए साइबर फ्रॉड के अपराधी को पकड़ने दूसरे प्रांत जाना था। ऐसा नहीं हुआ, रेल के बजाय हवा में उड़ गए। हवा में उड़ने का सुख भी पा गए। उनके इस सुख में बेचारे साइबर पीड़ित की जेबें ऐसे ढीली हुई कि वे सीधे आला अफसर के पास गुहार लगाने पहुंच गए। बस फिर क्या था, हवा से अफसर जमीन पर आ गिरे और मिल गई निलंबन की सजा। ये तो आप भी जानते हैं, बड़े खिलाड़ियों के निलंबन बहुत बड़ी सजा नहीं है। वे फिर कुछ दिन में ट्रैक पर आ जाएंगे। नुकसान सीआर का होगा। जिसे लेकर आज नहीं तो कल परेशानी तो बढ़ेगी ही बढ़ेगी।
अपमान, असहजता और बेगानेपन, यहां सबकुछ दिखा
पुलिस मैदान, यह पढ़ते ही दिगाम में स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस और दशहरा उत्सव की यादें ताजी हो जाती हे। सबकुछ इस मैदान में बेहद शालीनता के साथ होते आया है। यह परिपाटी इस बार टूट गई कहें या फिर दरक गई। हम ये आप पर छोड़ते हैं, आगे पढ़ने के बाद आप क्या आप्श्न लेकर आते हैं। सत्ताधारी दल के दिग्गजों को पहली बार ये बेगानापन महसूस हुआ। राज्य में सरकार होने के बाद ऐसी अहसजता इसके पहले कभी नहीं हुई। हद तो तब हो गई, जब शहर के सत्ताधारी दल से जुड़े जाने पहचाने और चिरपरिचित चेहरों के साथ बाहर से आए अफसरों ने ऐसा सुलकू किया पूछिए मत। हाथ पकड़ने से लेकर गेट पर रोकने की हिम्मत भी अफसरों ने जुटा ली। फिर जो कुछ हुआ, उसमें होली का त्योहार भी फीका पड़ गया। जरा सोचिए आखिर ऐसी नौबत आई ही क्यों। किसके इशारे पर यह सब हुआ।
कुर्सी दौड़ में निगम कर्मियों ने मार ली बाजी
इसे ही तो समय कहते हैं। पता नहीं कब किस पर मेहरबान हो जाए और कब किसके लिए रूठ जाए। बात जब स्वतंत्रता दिवस समारोह की चल पड़ी है तो इसे थोड़ा और आगे बढ़ा लेते हैं। वहीं चलते हैं, पुलिस मैदान। हमने बाहर की सीन देखी थी, सो पहले बाहर की सीन बताना जरुरी था। जरा अंदर चलिए और एचडी में भीतर की सीन देखते हैं। समारोह स्थल की पूरी कुर्सियां पैक। नगर निगम के दिग्गज नेताओं से लेकर भाजपा की एक तेज तर्रार नेत्री खड़ी नजर आईं। जिनके लिए कुर्सी रिजर्व रखी गई थी वे सब खड़े नजर आए और जिन्होंने वीआईपी के लिए कुर्सी रखी थी वे उसी में विराजमान दिखाई दिए। निगग अफसरों ने यहां उलटी गंगा बहा दी। नगर निगम में जिनके सामने खड़े होने की हिम्मत नहीं जुटा पाते वे सब खड़े थे और नजरें चुराने वाले विराजमान। ये भी गजब का सीन है।
यूथ कांग्रेस चुनाव और सोशल मीडिया वार
कांग्रेस में यूथ पॉलिटिक्स इन दिनों जोरों पर है। चुनाव में पूर्व सीएम और एक विधायक सीधेतौर पर आमने-सामने आ गए हैं। दोनों गुट में ही चुनाव को लेकर सीधी लड़ाई हो रही है। चुनावी कैंपनिंग अब सोशल मीडिया तक जा पहुंची है। सोशल मीडिया में एक वीडियो इन दिनों खूब चर्चा बटोर रही है। जरा आप भी देखिए वीडियो में दोनों ओर से किस तरह डायलागबाजी हो रही है। लोकल पॉलिटिक्स पर नजर डालते हैं। यूथ कांग्रेस चुनाव में शहर और जिला अध्यक्षों की क्या भूमिका है। ये दोनों किस तरह अपना रोल प्ले कर रहे हैं। कांग्रेस की राजनीति में ये तो उसी समय से जगजाहिर हो गया है, जब इनको कुर्सी मिली। कुर्सी भिलाई वाले भैया के रहमोकरम पर मिली है। जाहिर है गुटीय राजनीति में ये भिलाई वाले भैया की ओर ही नजर आएंगे या आ रहे हैं। जरा सोचिए, कुर्सी मिलने से पहले जिनके आगे पीछे घुमते थे उनसे कैसे नजरें मिलाएंगे और किस अंदाज में सफाई देंगे, ये उनका अपना काम है। पर जो हो रहा है, उससे तो आगे का रास्ता समझो बंद ही हो गया।
अटकलबाजी
पुलिस ग्राउंड में जो कुछ हुआ, सत्ताधारी दल में रिएक्शन किस अंदाज में कहां तक पहुंचा। राजधानी तक बात पहुंच गई है। पुलिस मैदान की कड़वाहट आने वाले दिनों में किस अंदाज में बाहर आएगा।
पड़ोसी जिले के पुलिस कर्मियों की हवाई यात्रा से आपको कुछ याद आया। एक ऐसा ही वाकया हमारे जिले में भी हुआ था। जरा याद करए तब कौन-कौन अफसर नप गए थे।
प्रधान संपादक




