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October 7, 2026 6:29 pm

नाट्यशास्त्र में चार दशक की साधना को मिली बड़ी मान्यता, डॉ. सतीश पावड़े को डि.लिट

चार साल के शोध में भारतीय नाट्य परंपरा और सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों का किया अध्ययन

CBN36 वर्धा, 7 अक्टूबर। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के प्रदर्शनकारी कला विभाग के वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर और प्रख्यात नाटककार एवं नाट्य निर्देशक डॉ. सतीश पावड़े को साहित्य विद्या में उच्चतम शोध उपाधि डि.लिट. (विद्यावाचस्पति) प्रदान की जाएगी। राजकुमारी इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) के कला संकाय ने इसकी घोषणा की है।

डॉ. पावड़े ने पिछले चार वर्षों से “नाट्यशास्त्र का समाजशास्त्रीय अध्ययन एवं विश्लेषण” विषय पर शोधकार्य किया। शोध में भारतीय नाट्य परंपरा, नाट्यशास्त्र और उसके सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भों का गहन अध्ययन एवं विश्लेषण किया गया है। डि.लिट. की उपाधि उनके लंबे अकादमिक और शोध कार्य को महत्वपूर्ण मान्यता के रूप में देखी जा रही है।

28 पुस्तकें प्रकाशित, देश-विदेश में व्याख्यान

डॉ. पावड़े देश के चर्चित नाटककार, रंगकर्मी, नाट्यचिंतक और समीक्षक हैं। उन्हें भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की रवीन्द्रनाथ टैगोर रिसर्च फेलोशिप और संगीत नाटक अकादमी की शोध परियोजना स्कॉलरशिप मिल चुकी है। उन्होंने भारत के विभिन्न विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ कनाडा और श्रीलंका में भी नाट्यशास्त्र पर व्याख्यान दिए हैं।

नाट्यलेखन, नाट्य आलोचना, चरित्र-लेखन, संपादन, अनुवाद और रूपांतरण के क्षेत्र में उनकी 28 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। वे महाराष्ट्र राज्य के नाटक सेंसर बोर्ड के तीन बार सदस्य तथा महाराष्ट्र शासन के मराठी विश्वकोश नाट्यज्ञानमंडल के दो बार सलाहकार एवं सदस्य रह चुके हैं।

श्रीलंका की दो संस्थाओं में अकादमिक सलाहकार

वर्तमान में डॉ. पावड़े श्रीलंका की प्लेटो अकादेमी ऑफ परफार्मिंग आर्ट्स और टाइम्स इंटरनेशनल अकादमी फॉर ग्रैजुएट स्टडीज के वरिष्ठ अकादमिक सलाहकार हैं। इसके अलावा वे संगीतसूर्य केशवराव भोसले सांस्कृतिक परिषद, भारत गणराज्य के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में भी दायित्व निभा रहे हैं। उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अनेक पुरस्कार एवं सम्मान मिल चुके हैं।

उनकी समीक्षा पुस्तक “नाट्यशास्त्र : परंपरा, प्रयोग आणि विमर्श” का प्रकाशन अगले माह अनामिका प्रकाशन, प्रयागराज से प्रस्तावित है।

1996 में हासिल की थी महाराष्ट्र की पहली शोध उपाधि

डॉ. सतीश पावड़े ने वर्ष 1996 में नागपुर विश्वविद्यालय से नाट्यकला विषय में प्रदर्शनकारी कला (नाट्यकला) की महाराष्ट्र की पहली शोध उपाधि प्राप्त की थी। अब डि.लिट. की उपाधि उनके दशकों लंबे नाट्य-अध्ययन, शोध, लेखन और अकादमिक योगदान में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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