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August 15, 2026 12:22 am

ऊर्जा से राष्ट्र निर्माण तक: एसईसीएल के संकल्प की नई उड़ान

“चार साल देश को ईंधन देने के साथ भविष्य को हरित बनाने की दिशा में बढ़ते कदम,अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन ने 80 वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देशवासियों एवं कोयलांचल परिवार को दी शुभकामनाएं”

CBN 36 बिलासपुर। आजादी के 80वें वर्ष का उत्सव केवल स्वतंत्रता की गौरवगाथा को स्मरण करने का अवसर नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका को और मजबूत करने के संकल्प का भी पर्व है। इसी भावना के साथ साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड एसईसीएल ऊर्जा सुरक्षा से लेकर पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक विकास तक अपने दायित्वों को नई दिशा और नई गति दे रहा है।

देश की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला एसईसीएल अब केवल कोयला उत्पादन तक सीमित नहीं है। सुरक्षित एवं उत्तरदायी खनन, हरित तकनीक, खनन के बाद भूमि का पुनर्विकास और समाज के समग्र विकास को साथ लेकर कंपनी विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान सुनिश्चित कर रही है।

ऊर्जा सुरक्षा के साथ सतत विकास का संकल्प

एसईसीएल का मूल दायित्व राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है। इस दायित्व के साथ कंपनी का प्रयास है कि ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन कायम रहे।

इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए एसईसीएल सुरक्षित खनन पद्धतियों, पर्यावरण संरक्षण और हरित तकनीकों को प्राथमिकता दे रहा है। कंपनी का स्पष्ट विश्वास है कि आज की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करते हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और हरा-भरा भविष्य तैयार करना भी उतना ही जरूरी है।

नारी शक्ति को नई पहचान, नए अवसर

राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करने की दिशा में एसईसीएल की पहल ‘प्रोजेक्ट धरा शक्ति’ एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस पहल के माध्यम से महिलाओं को तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर उपलब्ध कराने के साथ उन्हें आत्मनिर्भरता और नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। यह पहल केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण को कार्यस्थल की वास्तविक शक्ति में बदलने का प्रयास है।

वैज्ञानिक माइन क्लोजर में एसईसीएल की अग्रणी पहल

खनन समाप्त होने के बाद उस भूमि का क्या होगा इस सवाल का जवाब एसईसीएल अपनी माइन क्लोजर पहलों के माध्यम से दे रहा है।

देश में सर्वाधिक 28 माइन क्लोजर पूर्ण कर एसईसीएल ने खनन के बाद भूमि के पुनर्विकास, पर्यावरण संरक्षण और हरित भविष्य की दिशा में उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत किया है।

यह पहल इस बात का प्रमाण है कि खनन केवल उत्पादन तक सीमित प्रक्रिया नहीं, बल्कि खनन के बाद प्रकृति और भूमि को पुनर्जीवित करने की जिम्मेदारी भी है।

365 करोड़ रुपये से अधिक की सीएसआर पहल

एसईसीएल के लिए राष्ट्र निर्माण का अर्थ केवल ऊर्जा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन समुदायों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है, जिनके बीच कंपनी काम करती है।

वित्त वर्ष 2025-26 में 365 करोड़ रुपये से अधिक की सीएसआर योजनाएं स्वीकृत कर एसईसीएल ने शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, पेयजल, खेल और सामुदायिक आधारभूत सुविधाओं के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया है।

इन पहलों के जरिए कंपनी समाज के जरूरतमंद वर्गों तक विकास की सुविधाएं पहुंचाने और स्थानीय समुदायों के जीवन स्तर में सुधार लाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

कोयले की ऊर्जा से हरित भविष्य की ओर

एसईसीएल की यात्रा अब एक ऐसे पड़ाव पर है, जहां ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामाजिक सरोकार एक साथ आगे बढ़ रहे हैं।

हरित तकनीक को अपनाते हुए उत्तरदायी खनन, महिलाओं को नए अवसर, खनन के बाद भूमि का पुनर्विकास और समाज के विकास के लिए सीएसआर-ये सभी प्रयास एसईसीएल की उस व्यापक सोच को दर्शाते हैं, जिसमें वर्तमान की ऊर्जा जरूरतों के साथ भविष्य की पीढ़ियों की चिंता भी शामिल है।

हमारा संकल्प-समृद्ध राष्ट्र, समृद्ध कोयलांचल

80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एसईसीएल ने अपने संकल्प को दोहराते हुए कहा है कि समृद्ध राष्ट्र के साथ समृद्ध कोयलांचल, सशक्त नारी, सुरक्षित पर्यावरण और विकसित भारत की दिशा में कंपनी अपनी भूमिका पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाती रहेगी।

एसईसीएल अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देशवासियों एवं कोयलांचल परिवार को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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