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September 29, 2026 3:50 pm

भिलाई इस्पात संयंत्र लोहा-स्क्रैप चोरी की जांच अब CBI के हवाले

राज्य सरकार ने दी सहमति, 25 सितंबर के राजपत्र में अधिसूचना; अब तक 21 आरोपी गिरफ्तार

CBN36 छत्तीसगढ़ । भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) से कथित लोहा-स्क्रैप चोरी के बहुचर्चित मामले में अब जांच का दायरा बढ़ गया है। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपने के लिए सहमति दे दी है। 25 सितंबर को जारी राजपत्र अधिसूचना में अपराध क्रमांक 277/2026 से जुड़े मामले में दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (CBI) को राज्य में जांच के लिए सहमति दिए जाने का उल्लेख है। 

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने बातचीत के दौरान भी मामले की जांच CBI को सौंपे जाने की जानकारी दी। राज्य सरकार के इस फैसले के बाद अब प्लांट से स्क्रैप बाहर निकालने से लेकर उसके परिवहन और कथित तौर पर निजी औद्योगिक इकाई में खपाने तक की कड़ियां केंद्रीय जांच के दायरे में आ सकती हैं।

250 टन स्क्रैप बरामद होने के बाद खुला मामला

मामला 26 मई 2026 को सामने आया था। पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र के अकलोरडीह खदानपारा स्थित ए.के. ट्रेडर्स के परिसर में कार्रवाई के दौरान पुलिस ने करीब 250 टन लौह स्क्रैप बरामद किया था। पुलिस ने स्क्रैप के साथ परिवहन और लोडिंग में इस्तेमाल किए जा रहे वाहन व मशीनरी भी जब्त की थी। जब्त सामग्री और वाहनों की कुल कीमत करीब 3.22 करोड़ रुपये आंकी गई थी। 

पुलिस की जांच में आरोप सामने आया कि फ्लू डस्ट ले जाने वाले वाहनों की आड़ में लौह स्क्रैप को संयंत्र से बाहर निकाला जाता था। इसके बाद इसे अलग-अलग स्थानों पर रखने और आगे खपाने की कड़ियों की जांच की गई। 

रसमड़ा की कंपनी तक पहुंची जांच

जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर चोरी के स्क्रैप को रसमड़ा स्थित रायपुर पावर एंड स्टील लिमिटेड में खपाए जाने से संबंधित साक्ष्य मिले। इसके बाद कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार गर्ग और डायरेक्टर संदीप कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया। दोनों को अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक रिमांड पर भेजा गया। इनके साथ मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 21 तक पहुंच गई थी। 

अब CBI खंगालेगी पूरी कड़ी

CBI जांच शुरू होने के बाद प्लांट से स्क्रैप बाहर निकलने की प्रक्रिया, परिवहन व्यवस्था, संबंधित दस्तावेज, स्क्रैप की खरीद-बिक्री और उसे खपाने में शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल हो सकती है। साथ ही जांच में सामने आए प्लांट के अंदर और बाहर के नेटवर्क की भी विस्तृत जांच होने की संभावना है। इन पहलुओं पर अंतिम निष्कर्ष जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा। 

इस मामले में वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन की ओर से भी CBI जांच की मांग को लेकर केंद्र सरकार को पत्र भेजा गया था। अब राज्य सरकार की सहमति और राजपत्र अधिसूचना के बाद मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी के दायरे में आ गई है। 

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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