
दिल्ली से पहुंचे 43 इंफ्लुएंसर्स ने देखा शांति, विकास और आत्मनिर्भरता का संगम; शहीद वीर गुंडाधुर की विरासत से भी हुए परिचित
CBN36 रायपुर, 29 सितंबर। कभी नक्सल हिंसा और भय की खबरों के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर में अब बदलाव की तस्वीर दिखाई देने लगी है। इसी बदलाव को करीब से देखने और समझने के लिए दिल्ली से पहुंचे 43 इंफ्लुएंसर्स और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने बस्तर का भ्रमण किया। नेतानार में उन्होंने शांति के साथ विकास और महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की दिशा में हो रहे प्रयासों को करीब से देखा।
इंफ्लुएंसर्स नेतानार स्थित शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा पहुंचे। यहां उन्होंने महिलाओं के लिए संचालित सिलाई-कढ़ाई और अन्य स्वरोजगार गतिविधियों की जानकारी ली। प्रशिक्षण केंद्र में सिलाई मशीनों पर काम करती महिलाओं को देखकर उन्होंने उनके अनुभव भी जाने। महिलाओं ने बताया कि प्रशिक्षण के माध्यम से वे अपने हुनर को रोजगार से जोड़कर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
हुनर से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहीं महिलाएं

नेतानार में महिलाओं को सिलाई-कढ़ाई सहित विभिन्न स्वरोजगार गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्थानीय महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें आय के साधनों से जोड़ना है। इंफ्लुएंसर्स ने प्रशिक्षण ले रही महिलाओं से सीधे संवाद कर उनके अनुभव और प्रशिक्षण से मिले अवसरों के बारे में जानकारी ली।
महिलाओं के हाथों में चलती सिलाई मशीनें बस्तर के बदलते सामाजिक परिवेश की तस्वीर पेश करती नजर आईं। जहां कभी इस क्षेत्र की चर्चा हिंसा और भय के संदर्भ में होती थी, वहीं अब स्थानीय स्तर पर रोजगार और आत्मनिर्भरता की गतिविधियां भी बदलाव का हिस्सा बन रही हैं।
गुंडाधुर की विरासत को भी जाना

भ्रमण के दौरान इंफ्लुएंसर्स ने बस्तर के वर्तमान के साथ उसके इतिहास और गौरवशाली विरासत को भी समझा। उन्होंने शहीद वीर गुंडाधुर के जीवन, उनके योगदान और बस्तर के इतिहास में उनके महत्व की जानकारी ली।
नेतानार में ऐतिहासिक विरासत और वर्तमान में चल रही स्वरोजगार गतिविधियों का यह मेल इंफ्लुएंसर्स के लिए बस्तर को समझने का अलग अनुभव रहा। एक ओर यहां जननायकों की स्मृतियां और इतिहास जुड़ा है, तो दूसरी ओर स्थानीय महिलाएं अपने हुनर के जरिए आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।
कैमरों में दर्ज हुआ बदलते बस्तर का चेहरा

दिल्ली से आए डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स ने बस्तर को केवल सुनी-सुनाई बातों या पुरानी खबरों के आधार पर नहीं, बल्कि जमीन पर पहुंचकर देखा। भ्रमण के दौरान उन्होंने स्थानीय लोगों से संवाद किया और क्षेत्र की संस्कृति, इतिहास, प्राकृतिक सौंदर्य तथा बदलते जनजीवन को करीब से समझा।
43 इंफ्लुएंसर्स अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से बस्तर के इस अनुभव को देश-दुनिया तक पहुंचाएंगे। उनके कंटेंट में बस्तर के पर्यटन स्थलों के साथ स्थानीय संस्कृति, इतिहास, लोगों की जीवनशैली और सामाजिक बदलाव की झलक देखने को मिलेगी।
नकारात्मक छवि से आगे नई पहचान की ओर

बस्तर की पहचान अब केवल उसके अतीत और नक्सल हिंसा से जुड़ी खबरों तक सीमित नहीं है। आदिवासी संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय प्रतिभाओं के साथ क्षेत्र में विकास और स्वरोजगार की गतिविधियां भी सामने आ रही हैं।

नेतानार में महिलाओं का हुनर इसी बदलाव का एक मानवीय चेहरा बनकर सामने आया। दिल्ली से आए इंफ्लुएंसर्स के कैमरों में बस्तर की ऐतिहासिक विरासत के साथ महिलाओं के हाथों में चलती सिलाई मशीनें भी कैद हुईं। ये तस्वीरें बस्तर में शांति, संस्कृति, पर्यटन और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते बदलाव की कहानी कहती नजर आईं।
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