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August 14, 2026 2:45 pm

कानाफूसी

सजा भी और दिल खोलकर ईनाम भी


छत्तीसगढ़ की पुलिस अब पुरी तरह अपडेट हो रही है। थाने की लिखापढ़ी के दिन लदने वाले हैं। अब सबकुछ ऑनलाइन सिस्टम के जरिए पुलिसिंग होगी, रिपोर्ट लिखे जाएंगे और उसे ऑनलाइन अपडेशन भी करेंगे। यह काम छत्तीसगढ़ में शुरु हो चुका है। हमारी पुलिस भी अपडेट हो रही है। ताजा अपडेट यही है, इसकी मानिटरिंग जिले के एसएसपी बेहद गंभीरता के साथ कर रहे हैं। तभी तो बीते दिनों लंबा चौड़ा आदेश जारी हुआ। आदेश में लापरवाही पुलिस कर्मियों को सजा दी तो अच्छा काम करने वाले को दिल खोलकर ईनाम भी दिया गया। एसएसपी ने ऐसा कर साफ संदेश दे दिया है। अच्छा काम करने वालों के लिए पूरा आसमान खुला है। काम करो और शाबासी पाओ। सीआर भी सुधारो। जिले के कप्तान ने पुलिस कर्मियों के बीच एक स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा की शुरुआत कर दी है। जाहिर है पुलिस कर्मी जितना अपडेट होंगे, आगे चलकर काम उन्हीं का आसान होने वाला है।

सीआर बताएगा काम अच्छा हुआ या फिर फिसड्डी


बात जब नए कानून और पुलिस के अपडेशन की चल ही पड़ी है तो इसे थोड़ा और आगे बढ़ा लेते हैं। आने वाले दिनों में पुलिस कर्मियों के सीआर को देखकर यह पता चल जाएगा, उनका कामकाज कैसा चल रहा है। सिस्टम के साथ अपने आपको फिट बैठा पा रहे हैं या नहीं। या फिर फिट बैठाने के बाद उनकी ओर से लापरवाही बरती जा रही है। यह सब जानने और परखने के लिए सीआर जो है ना। तभी तो जिले के कप्तान में नए कानून के तहत ऑनलाइन अपडेशन को लेकर नया सिस्टम लागू कर दिया है। जिन पुलिस कर्मियों का काम बेहतर है, उनको कैश रिवार्ड के साथ ही सीआर में पाॅजिटिव रिवार्ड देने की शुरुआत कर दी है। आगे तो आप समझ ही गए होंगे, जिनका काम ठीक नहीं है, या फिर लगातार लापरवाही बरती जा रही है, उनका सीआर रिवार्ड कैसे हो रहा है, या किस अंदाज में रिवार्ड मिल रहा है।

एक स्टेटस सिंबल यह भी


स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर सत्ताधारी दल से जुड़े दिग्गजों की धड़कने दो तीन दिन पहले कुछ ज्यादा ही बढ़ी रहती है। कारण आज भी अच्छी तरह समझ रहे हैं। ऐसा क्यों होता है। हार्टबीट बढ़ क्यों जाता है। यह तब तक जोर-जोर से धड़कते रहता है, जब तक समारोह के लिए सामान्य प्रशासन विभाग चीफ गेस्ट की सूची जारी नहीं कर देता। सूची में नाम होाने का मतलब सरकार में आज भी पूछपरख बाकी है। जिला चाहे कोई भी हो। सूची में नाम होना ही अपने आप में बड़ी बात होती है। आपको पता है, नेताजी जैसा ही हाल कमोबेश बेहद करीबियों का भी रहता है। नेताजी का सरकार में रुतबा कायम रहने का मतलब है, करीबी भी उसी अंदाज में अपना पौव्वा बनाकर रखते हैं। अब यह मत पूछिए, जिले के कौन-कौन कद्दावर नेता सामान्य प्रशासन की सूची से छूट गए।

एटीएम ग्रेंस से राशन वाकई में मिलने लगा तो इनका क्या होगा


अविभाजित मध्य प्रदेश के जमाने से लेकर मौजूदा दौर में राशन दुकान हासिल करना अपने आप में बड़ी बात होती है। जिले को छोड़िए, जरा शहर के राशन दुकानों और दुकानदारों की ओर नजर दौड़िए। किस दल के ताल्लुक रखने वाले आपको नजर आते हैं। अभी भी राशन दुकान हासिल करने के लिए क्या-क्या नहीं करने पड़ते। उस दौर में दुकानदारों का जलवा और रुतबा देखते ही बनता था, जलवा और रुतबा तो अब भी है, फर्क सिर्फ इतना है, मौजूदा दौर में कुछ गिने-चुने ही इस तरह का सुख भोग रहे हैं। अब तो इनके भी बेचैन होने का दिन आ गया है। ऐसा भी कह सकते हैं, सरकार ने इनका भी सुख छीनने का बंदोबस्त कर दिया है। हमारे शहर में भी अब एटीएम ग्रेंस मशीन राशन कार्डधारकों का चावल दे रही है। पूरे शहर में मशीन ही चावल देने लगे तब इनका क्या होगा।

अटकलबाजी


एटीएम ग्रेंस मशीन से चावल की आपूर्ति पूरे छत्तीसगढ़ में शुरु हो गई है, तब क्या होगा। फूड डिपार्टमेंट के अफसर एडजस्ट करने कहां जाएंगे। ऑप्शन की तलाश करनी पड़ेगी। दुकानदारों का क्या होगा?

सत्ताधारी दल से जुड़े दिग्गजों की ओर नजर घुमाइए, देखिए किनका चेहरा मायूस नजर आ रहा है। समर्थक अपने समर्थकों को किस तरह दिलासा दिला रहे हैं?

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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