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August 13, 2026 8:21 pm

सीआईएसएफ जवानों को साइबर ठगी के नए तरीकों से किया जागरूक

फर्जी केवाईसी , डिजिटल अरेस्ट से लेकर AI वीडियो तक, ठगी के तरीकों की दी जानकारी; 1930 पर तत्काल शिकायत की दी सलाह

रायगढ़, 13 अगस्त। साइबर अपराधों से बचाव के लिए रायगढ़ पुलिस की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में घरघोड़ा पुलिस ने तिलाईपाली स्थित सीआईएसएफ कैंप में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें सीआईएसएफ कंपनी के अधिकारियों और जवानों को साइबर ठगी के बदलते तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। थाना प्रभारी घरघोड़ा निरीक्षक कुमार गौरव साहू ने जवानों को साइबर अपराधों के विभिन्न तरीकों के बारे में विस्तार से समझाया।

बैंक अधिकारी बनकर करते हैं ठगी

पुलिस ने बताया कि साइबर अपराधी बैंक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, TRAI, बिजली विभाग, कूरियर कंपनी या रिश्तेदार बनकर लोगों को फोन करते हैं। डर या लालच पैदा कर OTP, UPI PIN, ATM PIN, CVV और बैंक पासवर्ड जैसी गोपनीय जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जाता है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी अनजान व्यक्ति के साथ ऐसी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

फर्जी केवाईसी और QR कोड से सावधान

जवानों को फर्जी केवाईसी अपडेट, बैंक खाता बंद होने का झांसा, बिजली कनेक्शन काटने की धमकी, फर्जी कूरियर पार्सल, OLX और ऑनलाइन खरीद-बिक्री, फर्जी निवेश एवं ट्रेडिंग एप, QR कोड व UPI फ्रॉड तथा फर्जी लोन एप के जरिए होने वाली ठगी से सावधान रहने की सलाह दी गई। पुलिस ने बताया कि UPI PIN पैसे प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि भुगतान करने के लिए दर्ज किया जाता है।

डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराते हैं अपराधी

साइबर ठगी के नए तरीके ‘डिजिटल अरेस्ट’ को लेकर भी विशेष रूप से जागरूक किया गया। अपराधी वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस, CBI, ED या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं और पैसे ट्रांसफर करने का दबाव बनाते हैं। पुलिस ने बताया कि कोई भी सरकारी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट कर बैंक खाते में पैसे जमा कराने का निर्देश नहीं देती।

फर्जी लिंक और एपीके फाइल से भी खतरा

मोबाइल पर आने वाले अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करने और WhatsApp या अन्य माध्यमों से मिली संदिग्ध APK फाइल इंस्टॉल नहीं करने की सलाह दी गई। पुलिस के अनुसार, ऐसी फाइलों के जरिए साइबर अपराधी मोबाइल का नियंत्रण हासिल कर बैंकिंग और निजी जानकारी तक पहुंचने का प्रयास कर सकते हैं।

एआई आवाज और वीडियो से भी हो रही ठगी

कार्यक्रम में एआई आधारित आवाज और वीडियो, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल तथा परिचित व्यक्ति बनकर पैसे मांगने वाले मामलों के बारे में भी जानकारी दी गई। पुलिस ने कहा कि केवल आवाज या वीडियो देखकर किसी व्यक्ति की पहचान पर भरोसा न करें। परिचित व्यक्ति द्वारा अचानक पैसे मांगने पर उसके पुराने या वैकल्पिक नंबर पर संपर्क कर पहले पुष्टि कर लें।

ठगी होते ही 1930 पर करें शिकायत

साइबर ठगी का शिकार होने पर तत्काल 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करने तथा cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी गई। पुलिस ने बताया कि ठगी के तुरंत बाद शिकायत करने से रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने और उसे फ्रीज कराने की संभावना बढ़ जाती है।

कार्यक्रम में सीआईएसएफ अधिकारियों और जवानों ने साइबर अपराधों के बदलते स्वरूप और बचाव के उपायों को गंभीरता से समझा। रायगढ़ पुलिस की ओर से आम नागरिकों के साथ-साथ शासकीय विभागों, सुरक्षा बलों और विभिन्न संस्थानों में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति लगातार जागरूक किया जा रहा है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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