वनरक्षक व पक्षी शोधकर्ता मनेशकुमार सज्जन ने किया अवलोकन, वर्धा जिले में चौथी बड़ी उपलब्धि
CBN36 वर्धा। जिले के पक्षी संसार में एक और दुर्लभ प्रजाति दर्ज हुई है। गांधीबाग नर्सरी एवं वन अनुसंधान केंद्र परिसर में दुर्लभ और शर्मीले स्वभाव वाले चित्तीदार सातभाई (Puff-throated Babbler) की मौजूदगी दर्ज की गई है। वनरक्षक एवं वन्यजीव शोधकर्ता मनेशकुमार सज्जन ने छह अगस्त की सुबह पक्षी अवलोकन के दौरान इसे देखा। उन्होंने पक्षी की गतिविधियों को कैमरे में कैद करने के साथ आवश्यक वैज्ञानिक आंकड़े भी दर्ज किए।
घनी झाड़ियों और सूखे पत्तों में छिपकर रहता है
चित्तीदार सातभाई सामान्यत: जंगल के निचले हिस्सों, घनी झाड़ियों और सूखे पत्तों के बीच रहना पसंद करता है। इसके शर्मीले स्वभाव के कारण इसका खुले में दिखाई देना काफी मुश्किल माना जाता है। ऐसे में वन अनुसंधान केंद्र परिसर में इसकी मौजूदगी को क्षेत्र की समृद्ध जैव-विविधता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
वन अनुसंधान केंद्र में 90 से अधिक प्रजातियां दर्ज

मनेशकुमार सज्जन के अनुसार, वन अनुसंधान केंद्र परिसर में अब तक 90 से अधिक पक्षी प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है। इनमें क्रेस्टेड गॉशॉक, इंडियन पिट्टा, ऑरेंज-हेडेड थ्रश, एशियन ब्राउन फ्लाईकैचर, टिकेल्स ब्लू फ्लाईकैचर, ओरिएंटल हनी-बजर्ड, एशियन पैराडाइज फ्लाईकैचर और इंडियन स्कॉप्स आउल जैसी दुर्लभ एवं प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं।
बोर टाइगर रिजर्व में भी कर चुके हैं महत्वपूर्ण पुष्टि
सज्जन इससे पहले बोर टाइगर रिजर्व में इंडियन ब्लैकबर्ड, येलो-लेग्ड बटनक्वेल और चेंजेबल हॉक-ईगल की वर्धा जिले में पहली आधिकारिक पुष्टि कर चुके हैं। चित्तीदार सातभाई की पहचान जिले के पक्षी संसार में उनकी चौथी बड़ी उपलब्धि बताई जा रही है।
बोले- वैज्ञानिक निगरानी से सामने आएंगी और प्रजातियां
मनेशकुमार सज्जन ने कहा, “पक्षी अवलोकन केवल एक शौक नहीं, बल्कि जैव-विविधता को समझने और सहेजने का एक सशक्त माध्यम है। बोर टाइगर रिजर्व और वन अनुसंधान केंद्र दोनों ही प्राकृतिक रूप से बेहद समृद्ध हैं। यदि यहां नियमित और वैज्ञानिक तरीके से निगरानी रखी जाए तो भविष्य में कई और दुर्लभ पक्षी प्रजातियों की खोज संभव है।”
एल्बिनो बुलबुल के दस्तावेजीकरण में भी निभाई थी भूमिका
गौरतलब है कि पिछले महीने 26 जुलाई को वर्धा में डॉ. वीरेंद्र प्रताप यादव द्वारा खोजे गए दुर्लभ एल्बिनो बुलबुल की पुष्टि और दस्तावेजीकरण भी मनेशकुमार सज्जन ने किया था। अब चित्तीदार सातभाई की मौजूदगी दर्ज होने से वर्धा के समृद्ध पक्षी संसार में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है।
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