CBN36 वर्धा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्र, प्रयागराज में शुक्रवार को ‘एआई के दौर में हिंदी भाषा’ विषय पर आयोजित विशिष्ट व्याख्यान में एल्गो टेक्नोलॉजी, दुबई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बालेंदु शर्मा दाधीच ने कहा कि एआई के वर्तमान दौर में भाषा मानव की पहली प्रौद्योगिकी है। आने वाले वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से लगभग मानव स्तर का अनुवाद संभव होगा। जनरेटिव एआई ने भाषा के क्षेत्र में मशीनों की क्षमताओं में व्यापक बदलाव किया है।
उन्होंने कहा कि भाषा केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं, बल्कि मानव इतिहास और आधुनिक तकनीक की आधारशिला है। गणित और विज्ञान सहित लगभग हर विषय का आधार भी भाषा ही है। उन्होंने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से भाषा, गणित और प्रौद्योगिकी के परस्पर संबंधों को विस्तार से समझाया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक के साथ भाषा का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भारतीय ज्ञान परंपरा, तकनीकी समन्वय और एआई के उपयोग पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि एआई और मशीन अनुवाद समय की जरूरत हैं, लेकिन तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता से भाषाई और मानवीय क्षमताएं कमजोर नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में भाषा सदैव केंद्र में रही है। भाषाओं के संरक्षण से ही संस्कृति का संरक्षण संभव है। मातृभाषाओं के संवर्धन और शिक्षण पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। एआई और भाषा का समन्वय नई पीढ़ी को भाषाई संस्कृति से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।
भाषा विद्यापीठ की अधिष्ठाता प्रो. प्रीति सागर ने स्वागत भाषण दिया। अकादमिक निदेशक प्रो. अखिलेश कुमार दुबे ने मुख्य अतिथि का परिचय देते हुए उनके भाषा प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में योगदान पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में बालेंदु शर्मा दाधीच का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन भाषाविज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. विजया सिंह ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन स्त्री अध्ययन विभाग की सह-आचार्य डॉ. सुप्रिया पाठक ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी तथा विभिन्न विभागों के शिक्षकों ने प्रत्यक्ष एवं ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की।
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