CBN36 नई दिल्ली, 30 जुलाई। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को सुलझाने की दिशा में केंद्र सरकार ने नई पहल की है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू के आग्रह पर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने गुरुवार को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की उच्चस्तरीय बैठक कराई। बैठक में दोनों राज्यों ने महानदी जल बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की और समाधान के लिए संवाद जारी रखने पर सहमति जताई।

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल से मुलाकात कर महानदी जल विवाद के शीघ्र समाधान के लिए पहल करने का आग्रह किया था। इसके बाद दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक तय हुई। राजनीतिक दृष्टि से इसे केंद्र सरकार की उस कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, जिसके जरिए लंबे समय से लंबित अंतरराज्यीय जल विवाद को बातचीत के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया जा रहा है।
बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ सरकार ने महानदी के जल पर अपने अधिकार, किसानों के हितों, सिंचाई परियोजनाओं, पेयजल की जरूरतों और राज्य के विकास संबंधी आवश्यकताओं को प्रमुखता से रखते हुए अपना पक्ष रखा। वहीं, ओडिशा सरकार ने भी जल प्रवाह, जल बंटवारे और अपने हितों से जुड़े मुद्दों को विस्तार से रखा। दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क प्रस्तुत किए।
करीब चली चर्चा सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुई। बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि विवाद के समाधान के लिए टकराव के बजाय संवाद का रास्ता अपनाया जाएगा और आगे भी दोनों राज्यों के बीच बातचीत जारी रहेगी। माना जा रहा है कि लंबे समय बाद दोनों राज्यों के शीर्ष नेतृत्व का एक मंच पर बैठना विवाद के समाधान की दिशा में सकारात्मक संकेत है।
बैठक के बाद केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि महानदी केवल जल का नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका और किसानों के भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार दोनों राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर रही है और सकारात्मक सहयोग के जरिए महानदी जल विवाद का न्यायसंगत एवं स्थायी समाधान निकलेगा।
गौरतलब है कि महानदी जल बंटवारे को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच पिछले कई वर्षों से मतभेद बने हुए हैं। ऐसे में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की यह बैठक राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आगे होने वाली वार्ताओं में सहमति का कोई ठोस रास्ता निकल पाता है या नहीं।
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