वर्धा। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रशासनिक भवन के बाहर बिना अनुमति चल रहे धरना-प्रदर्शन को तत्काल समाप्त करने की अपील की है। विश्वविद्यालय का कहना है कि 8 जुलाई से कुछ विद्यार्थी और शोधार्थी पूर्व अनुमति के बिना प्रशासनिक भवन परिसर में धरना दे रहे हैं। शांति और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासनिक भवन के मुख्य प्रवेश द्वारों के चैनल गेट बंद किए गए हैं, हालांकि अधिकारियों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और अन्य आगंतुकों के आवश्यक कार्यों के लिए आवागमन की व्यवस्था जारी है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, 9 जुलाई की शाम कुलानुशासक मंडल की बैठक में स्थिति की समीक्षा की गई। इसके बाद परिसर में शांति और अनुशासन बनाए रखने के लिए सार्वजनिक सूचना जारी कर धरना दे रहे विद्यार्थियों और शोधार्थियों से सत्रांत परीक्षाओं, उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन, आगामी प्रवेश प्रक्रिया तथा अन्य महत्वपूर्ण शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों को देखते हुए प्रदर्शन समाप्त करने का अनुरोध किया गया।
प्रशासन का कहना है कि प्रदर्शनकारियों को बताया गया कि फिल्म अध्ययन विभाग और स्त्री अध्ययन विभाग के क्षेत्रीय केंद्र को प्रयागराज से वर्धा स्थानांतरित करने का विषय विश्वविद्यालय के वैधानिक निकायों, विद्या-परिषद और कार्य-परिषद, के अधिकार क्षेत्र में आता है। इस पर नियमानुसार संबंधित निकायों की बैठकों में ही निर्णय लिया जा सकेगा।
विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि सत्र 2022-23 की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया से जुड़ा साक्षात्कार स्थगन का मामला मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ में विचाराधीन है। वहीं सत्र 2023-24 और उसके बाद की पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया पर 27 जुलाई को प्रस्तावित विद्या-परिषद की बैठक में विचार किया जाएगा। इसके बावजूद प्रदर्शन जारी रहने की बात प्रशासन ने कही है।
विश्वविद्यालय के अनुसार, शुक्रवार को प्रशासनिक भवन के प्रवेश द्वार पर तैनात सुरक्षा कर्मी मनोज श्रीनाथे के साथ बीए एलएलबी के छात्र ब्रजेश सोनकर की कथित रूप से प्रवेश को लेकर धक्का-मुक्की हुई, जिसमें सुरक्षा कर्मी की एक उंगली में चोट आई। प्रशासन ने घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी विद्यार्थियों और शोधार्थियों से परिसर में शांति, अनुशासन और सौहार्द बनाए रखने तथा विश्वविद्यालय के नियमों का पालन करने की अपील की है।
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