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October 8, 2026 12:27 am

साइबर ठगी के पीड़ितों का पैसा वापस दिलाना पुलिस की प्राथमिकता: आईजी

बिलासपुर रेंज के साइबर अधिकारियों को मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल का दिया गया प्रशिक्षण, एसीसीयू टीम होगी सम्मानित

बिलासपुर। साइबर ठगी के शिकार लोगों को जल्द से जल्द उनकी रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को बिलासपुर रेंज में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज राम गोपाल गर्ग, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल मौजूद रहे। प्रशिक्षण में रेंज के सभी साइबर थाना प्रभारियों और संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया।

पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग ने कहा कि साइबर अपराधों में केवल बैंक खाता धारकों अथवा निचले स्तर के आरोपियों की गिरफ्तारी पर्याप्त नहीं है। पुलिस की वास्तविक सफलता तभी मानी जाएगी, जब ठगी का शिकार हुए व्यक्ति की राशि उसे वापस दिलाई जा सके। उन्होंने सभी अधिकारियों को मनी रेस्टोरेशन की प्रक्रिया को प्राथमिकता से अपनाने के निर्देश दिए।

प्रशिक्षण के दौरान भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अधीन इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के एनसीआरपी पोर्टल के दो प्रमुख मॉड्यूल की जानकारी दी गई। अधिकारियों को बताया गया कि मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से फ्रीज की गई ठगी की राशि को कानूनी प्रक्रिया और बैंक से समन्वय स्थापित कर पीड़ित के खाते में वापस कैसे कराया जा सकता है। वहीं ग्रीवांस रिड्रेसल मॉड्यूल के जरिए ऐसे मामलों में खातों को डी-फ्रीज करने की प्रक्रिया समझाई गई, जिनमें निर्दोष व्यापारियों या आम नागरिकों के खाते गलती से फ्रीज हो जाते हैं।

कार्यक्रम में बताया गया कि बिलासपुर एसीसीयू टीम ने मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से अब तक 2.36 लाख रुपये की राशि पीड़ितों को वापस दिलाई है, जबकि 60 प्रकरण वर्तमान में प्रक्रियाधीन हैं। इस उपलब्धि पर पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने एसीसीयू प्रभारी गोपाल सतपति एवं उनकी टीम की सराहना करते हुए उन्हें पुरस्कृत करने की घोषणा की।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल ने मनी रेस्टोरेशन से जुड़े अपने हालिया सफल प्रकरण को केस स्टडी के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को सरल तरीके से समझाया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न व्यावहारिक प्रश्न पूछे, जिनका समाधान करते हुए अन्य जिलों में भी इस प्रणाली को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया।

आईसीआईसीआई बैंक के विशेषज्ञ कमलेश वाल्दे ने बताया कि साइबर ठगी की राशि वापस कराने के लिए बैंकों को किन कानूनी दस्तावेजों और न्यायालय के आदेशों की आवश्यकता होती है। उन्होंने बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की भी जानकारी दी।

बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि साइबर अपराध में शामिल आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उनकी चल एवं अचल संपत्तियों का विवरण तैयार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाए, ताकि वे मुकदमे के दौरान संपत्ति का हस्तांतरण न कर सकें और आवश्यकता पड़ने पर पीड़ितों के नुकसान की भरपाई सुनिश्चित की जा सके।

वरिष्ठ अधिकारियों ने निर्देश दिए कि साइबर ठगी का शिकार होने वाला कोई भी व्यक्ति थाने पहुंचने पर साइबर सेल और थाने के बीच भटकने के लिए मजबूर न हो। पुलिस व्यवस्था को आमजन के लिए अधिक सुलभ और प्रभावी बनाया जा रहा है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की कि साइबर ठगी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। साथ ही मनी रेस्टोरेशन मॉड्यूल के माध्यम से अपनी ठगी गई राशि वापस पाने की प्रक्रिया का लाभ उठाएं।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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