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July 7, 2026 9:04 pm

करंट से तीन मौतें: हाईकोर्ट का स्वत: संज्ञान, बिजली विभाग से मांगा जवाब

सही पॉलिसी बनाने और असरदार सुरक्षा उपाय की ज़रूरत

बिलासपुर। कोटा ब्लॉक के भाड़म गांव में करंट लगने से तीन लोगों की मौत के मामले में हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सीएसपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक और ऊर्जा विभाग के सचिव को शपथपत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने अपने निर्देश में पूछा है कि प्रदेश में विद्युत अधोसंरचना (इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर) के निरीक्षण और रखरखाव की वर्तमान व्यवस्था क्या है। साथ ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए लागू सुरक्षा उपायों (सेफगार्ड) और लापरवाही की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया की भी विस्तृत जानकारी मांगी गई है।
अदालत ने संकेत दिया कि ऐसी दर्दनाक घटनाओं की रोकथाम के लिए केवल मुआवजा पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावी सुरक्षा नीति, नियमित निरीक्षण और जवाबदेही तय करने की मजबूत व्यवस्था भी आवश्यक है। इसमें इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के इंस्पेक्शन ,मेंटेनेंस के मौजूदा फ्रेमवर्क, ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए अभी मौजूद सेफगार्ड, और लापरवाही के मामलों में जिम्मेदारी तय करने का मैकेनिज्म शामिल होगा।
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डीबी ने कहा कि, इलेक्ट्रिक फेंसिंग की वजह से बार-बार होने वाली इंसानी जान के नुकसान के लिए एक सही पॉलिसी बनाने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए असरदार सुरक्षा उपाय अपनाने की ज़रूरत है* कोर्ट को ऐसे कई मामले देखने को मिले हैं जिनमें लोगों ने अपनी फसलों, प्रॉपर्टी या जानवरों को बचाने के लिए अपने खेतों, फार्महाउस, घरों और दूसरी प्रॉपर्टी को इलेक्ट्रिक फेंसिंग से घेर दिया है* जो लोग अनजाने में ऐसी इलेक्ट्रिक फेंसिंग के संपर्क में आते हैं, उन्हें अक्सर नुकसान होता है।
कोर्ट ने कहा कि बिजली का झटका लगने से कई लोगों की मौत हो जाती है और कई मामलों में उनकी जान भी चली जाती है, जिसके कारण ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ़ इंडियन पीनल कोड की धारा 304 ए के तहत क्रिमिनल केस दर्ज किए जाते हैं* हालांकि कानून के मुताबिक सही मामलों में क्रिमिनल केस चलाना ज़रूरी है, लेकिन ऐसी घटनाओं का बार-बार होना गंभीर चिंता का विषय है और इससे बचाव के असरदार उपायों की ज़रूरत पर ज़ोर पड़ता है* इस कोर्ट ने यह भी देखा है कि इलेक्ट्रिक फेंसिंग के नतीजे सिर्फ़ इंसानों तक ही सीमित नहीं हैं, कई मामलों में, घरेलू और जंगली जानवर भी ऐसी फेंसिंग के संपर्क में आए हैं, जिससे कीमती जानवरों की जान चली गई है* ऐसी घटनाएं दिखाती हैं कि इलेक्ट्रिक फेंसिंग न सिर्फ इंसानों की जान के लिए बल्कि पालतू और जंगली जानवरों के लिए भी एक बड़ा खतरा है, इसलिए सही बचाव और रेगुलेटरी उपाय अपनाने की ज़रूरत है* रजिस्ट्री को निर्देश दिया जाता है कि वह मैनेजिंग डायरेक्टर, छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड रायपुर, छत्तीसगढ़ को इस पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन में आज ही रेस्पोंडेंट नंबर 8 के तौर पर शामिल करे*
टाइम-बाउंड उपाय सुझाए
डीबी ने कहा कि,.पब्लिक सेफ्टी पक्का करने के लिए पक्के, टाइम-बाउंड उपाय सुझाए जाएं, और यह साफ़ किया जाए कि इस बारे में कोई पूरी पॉलिसी या स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर मौजूद है या नहीं* अगर ऐसी कोई पॉलिसी मौजूद नहीं है, तो वे ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए एक सही पॉलिसी बनाने और उसे लागू करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों के साथ-साथ एक पक्की टाइमलाइन भी बताएं* मामले को 23.जुलाई को फिर से लिस्ट किया गया है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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