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May 19, 2026 2:21 pm

छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर अवलोकितेश्वर कांस्य प्रतिमा फिर सजेगी संग्रहालय में

रायपुर। विश्व संग्रहालय दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से वर्षों पहले चोरी हुई भगवान अवलोकितेश्वर की दुर्लभ कांस्य प्रतिमा अब अमेरिका से भारत वापस लाई जा रही है। लगभग 19 करोड़ रुपये मूल्य की इस ऐतिहासिक प्रतिमा को पुनः रायपुर संग्रहालय में स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार ने औपचारिक पहल शुरू कर दी है।

प्रदेश के पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को पत्र लिखकर प्रतिमा को छत्तीसगढ़ वापस भेजने का आग्रह किया है। जानकारी के अनुसार प्रतिमा अभी भारत नहीं पहुंची है, लेकिन उसके आगमन के बाद राज्य शासन उसे रायपुर लाने और संग्रहालय में पुनर्स्थापित करने की प्रक्रिया को शीघ्र आगे बढ़ाएगा। मंत्री श्री अग्रवाल प्रतिमा की रिसीविंग के लिए दिल्ली जाने की तैयारी में हैं।

बताया गया है कि हाल के वर्षों में अमेरिका ने भारत को लगभग 1.4 करोड़ डॉलर मूल्य की 657 प्राचीन एवं ऐतिहासिक कलाकृतियां लौटाई हैं। इन्हीं में अवलोकितेश्वर की यह दुर्लभ कांस्य प्रतिमा भी शामिल है। सांस्कृतिक विरासत संरक्षण और चोरी हुई भारतीय धरोहरों की वापसी के क्षेत्र में इसे महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

सिरपुर की गौरवशाली विरासत से जुड़ी है प्रतिमा

यह प्रतिमा वर्ष 1939 में सिरपुर स्थित प्रसिद्ध लक्ष्मण मंदिर परिसर के निकट प्राप्त हुई थी। यह उस क्षेत्र में मिले कांस्य प्रतिमाओं के बड़े भंडार का हिस्सा थी। बाद में इसे सुरक्षित संरक्षण के लिए रायपुर स्थित संग्रहालय में रखा गया था, जहां से यह चोरी हो गई और बाद में अमेरिका पहुंच गई।

इतिहासकारों के अनुसार प्रतिमा पर अंकित शिलालेख में ‘द्रौणग्रिदत्त’ नाम का उल्लेख मिलता है, जिसे प्राचीन श्रीपुर, वर्तमान सिरपुर, का निवासी माना जाता है। इससे प्रतिमा का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।

अवलोकितेश्वर की यह प्रतिमा छत्तीसगढ़ की समृद्ध बौद्ध परंपरा, प्राचीन शिल्पकला और सांस्कृतिक पहचान की प्रतीक मानी जाती है। सिरपुर प्राचीन काल में बौद्ध संस्कृति, स्थापत्य और कला का प्रमुख केंद्र रहा है।

राज्य सरकार ने शुरू की औपचारिक प्रक्रिया

संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने अपने पत्र में कहा है कि यह प्रतिमा केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की ऐतिहासिक और बौद्ध विरासत की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने केंद्र सरकार से सभी प्रशासनिक एवं औपचारिक प्रक्रियाएं शीघ्र पूर्ण कर प्रतिमा को छत्तीसगढ़ शासन को सौंपने का आग्रह किया है, ताकि इसे सुरक्षित रूप से संग्रहालय में संरक्षित कर आमजन, शोधार्थियों और इतिहास प्रेमियों के अवलोकन हेतु उपलब्ध कराया जा सके।

उन्होंने कहा कि विदेश पहुंच चुकी यह ऐतिहासिक धरोहर अब पुनः भारत लौट रही है, जो सांस्कृतिक विरासत संरक्षण की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण उपलब्धि है। राज्य शासन प्रतिमा के संरक्षण, सुरक्षा और प्रदर्शन के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करेगा।

अवलोकितेश्वर प्रतिमा की वापसी को प्रदेश की खोई हुई सांस्कृतिक विरासत की पुनर्स्थापना तथा सिरपुर की ऐतिहासिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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