छत्तीसगढ़ । छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री बदलाव की चर्चाओं के बीच भाजपा संगठन और सत्ता के गलियारों से फिलहाल स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व पर पार्टी नेतृत्व का भरोसा बना हुआ है। अब तक के कार्यकाल का जो राजनीतिक और प्रशासनिक मूल्यांकन सामने आया है, उसमें साय की कार्यशैली को शांत, संतुलित और संगठन के अनुरूप माना गया है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सबसे बड़ी ताकत उनकी सहज और सरल छवि मानी जा रही है। आदिवासी समाज से आने वाले साय ने सत्ता संभालने के बाद टकराव की राजनीति के बजाय संवाद और प्रशासनिक समन्वय पर ज्यादा जोर दिया। वे लगातार जिलों के दौरे, योजनाओं की समीक्षा और जनप्रतिनिधियों से सीधे संवाद के जरिए ज़मीनी पकड़ मजबूत करने में लगे हैं। भाजपा संगठन भी मानता है कि साय ने सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया है।
बस्तर और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार की सक्रियता को भी उनके कार्यकाल की अहम उपलब्धि माना जा रहा है। केंद्र सरकार के साथ लगातार समन्वय बनाकर सुरक्षा, सड़क, शिक्षा और जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों को गति देने की कोशिश की गई है। हाल ही में मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों और सुरक्षा अभियानों की जानकारी भी साझा की थी।

इसी बीच अमित शाह का छत्तीसगढ़ दौरा राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री साय लगातार गृह मंत्री के साथ मौजूद रहे। प्रशासनिक बैठकों से लेकर सार्वजनिक कार्यक्रमों तक दोनों नेताओं के बीच बेहतर समन्वय का संदेश संगठन और कार्यकर्ताओं तक गया। भाजपा के भीतर इसे मुख्यमंत्री साय के प्रति केंद्रीय नेतृत्व के विश्वास के रूप में भी देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व फिलहाल छत्तीसगढ़ में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव के पक्ष में नहीं दिखाई दे रहा है। संगठन का फोकस सरकार की स्थिरता, लोकसभा के बाद संगठनात्मक मजबूती और आगामी चुनावी रणनीति पर केंद्रित है। ऐसे में माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को फिलहाल पूरी तरह काम करने का अवसर दिया जाएगा।
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