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April 2, 2026 9:52 pm

संघर्ष से सफलता तक: स्विमिंग पूल में काम कर कुश्ती सीखने वाली देबी डायमारी ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में जीता रजत

“देबी ने कहा कि उनका लक्ष्य सीनियर स्तर पर और पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। इसके लिए वे लगातार कड़ी मेहनत कर रही हैं”

रायपुर, 02 अप्रैल 2026।असम की महिला पहलवान देबी डायमारी ने कठिन परिस्थितियों को पीछे छोड़ते हुए ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ में महिलाओं के 62 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक जीतकर अपनी मेहनत और जज्बे का परिचय दिया है। उनका यह सफर संघर्ष, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास का प्रेरक उदाहरण है।

गोलाघाट जिले के सिसुपानी (दिनेशपुर) गांव की रहने वाली 28 वर्षीय देबी ने बचपन में ही माता-पिता को खो दिया था। इसके बाद उनका पालन-पोषण चाचा-चाची ने किया। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें अपनी ट्रेनिंग जारी रखने के लिए छोटे-मोटे काम करने पड़े।

देबी ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2022 में बोकाखात स्थित काजीरंगा के पास ‘खेलो इंडिया सेंटर’ में कुश्ती की शुरुआत की। ट्रेनिंग के लिए उन्हें सेंटर के पास किराये पर रहना पड़ा, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने पार्ट टाइम नौकरी भी की। शुरुआत में उन्होंने ईजी बाजार स्टोर में 2500 रुपये मासिक वेतन पर काम किया और बाद में काजीरंगा के बोन विला रिसॉर्ट में करीब 7000 रुपये मासिक वेतन पर स्विमिंग पूल की देखभाल का काम किया।

उन्होंने कहा, “दिनभर काम करने के बाद मुझे शाम को केवल दो घंटे ही अभ्यास का समय मिलता था। उसी मेहनत का परिणाम है कि आज मैं रजत पदक जीत पाई हूं, लेकिन मेरा लक्ष्य अभी स्वर्ण पदक जीतना है।”

कुश्ती से पहले देबी पावरलिफ्टिंग और आर्म रेसलिंग में सक्रिय थीं। वर्ष 2022 में उनकी मुलाकात कोच अनुस्तूप नाराह से हुई, जिनके मार्गदर्शन में उन्होंने कुश्ती के दांव-पेंच सीखे। कोच नाराह ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए उन्हें प्रशिक्षण के लिए प्रेरित किया और रहने व रोजगार की व्यवस्था में भी सहयोग किया।

देबी ने उसी वर्ष सीनियर चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया और 2024 में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया। हाल ही में विवाह के बाद भी उनके ससुराल और पति का उन्हें पूरा समर्थन मिल रहा है, जिससे वे अपने खेल पर पूरा ध्यान केंद्रित कर पा रही हैं।

देबी ने कहा कि उनका अगला लक्ष्य सीनियर स्तर पर और पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। इसके लिए वे लगातार कड़ी मेहनत कर रही हैं।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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