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April 2, 2026 6:26 pm

 रायगढ़ पुलिस की बड़ी कार्रवाई: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 23 लाख की ठगी करने वाला अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह बेनकाब 

“एसएसपी शशि मोहन सिंह ने की आम नागरिकों से अपील, कहा डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। अज्ञात कॉल या खुद को अधिकारी बताकर धमकी देने वालों से सावधान रहें,बैंकिंग जानकारी साझा न करें और संदेह होने पर तत्काल पुलिस से संपर्क करें,साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे प्रभावी उपाय”

रायगढ़, 2 अप्रैल 2026।रायगढ़ पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने इस मामले में बैंगलूरू से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह का मुख्य सरगना दुबई से नेटवर्क संचालित कर रहा था।

पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, थाना पुसौर क्षेत्र के ग्राम जतरी निवासी 72 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक गरुण सिंह पटेल से 23 लाख 28 हजार रुपये की ठगी की गई थी। आरोपियों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को डराया-धमकाया और जांच के नाम पर रकम ट्रांसफर कराने के लिए मजबूर किया। पीड़ित ने भयवश 25 से 29 अक्टूबर 2025 के बीच 12 किस्तों में रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दी।

मामले की शिकायत मिलने के बाद पुसौर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए तकनीकी जांच शुरू की। बैंक ट्रांजेक्शन, यूपीआई आईडी और मोबाइल नंबरों के आधार पर आरोपियों की लोकेशन बैंगलूरू में ट्रेस की गई। इसके बाद थाना प्रभारी मोहन भारद्वाज के नेतृत्व में पुलिस टीम ने स्थानीय पुलिस की मदद से विग्नेश पी (29) और स्टीफन थॉमस (54) को गिरफ्तार किया।

जांच में खुलासा हुआ कि गिरोह का संचालन दुबई में रह रहे फिरोज खान उर्फ डॉम्निक द्वारा किया जा रहा था। वह अपने साथियों के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट, आधार-सिम लिंकिंग, फर्जी लोन ऐप और क्रिप्टो निवेश जैसे तरीकों से देशभर में ठगी कर रहा था। गिरफ्तार आरोपी कमीशन के बदले ठगी की रकम अपने खातों में प्राप्त कर आगे ट्रांसफर करते थे।

पुलिस ने आरोपियों के खातों में जमा 17 लाख रुपये से अधिक की राशि होल्ड करा दी है और घटना में प्रयुक्त दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। दोनों आरोपियों को ट्रांजिट रिमांड पर रायगढ़ लाकर न्यायिक रिमांड में भेज दिया गया है, जबकि मुख्य आरोपी अभी फरार है।

क्या कहा एसएसपी ने 

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। किसी भी अज्ञात कॉल या खुद को अधिकारी बताकर धमकी देने वालों से सावधान रहें। किसी भी परिस्थिति में बैंकिंग जानकारी साझा न करें और संदेह होने पर तत्काल पुलिस से संपर्क करें। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे प्रभावी उपाय है।

एसएसपी आईपीएस शशि मोहन सिंह ने बताया कि थाना पुसौर क्षेत्र के ग्राम जतरी निवासी 72 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक गरुण सिंह पटेल से 23 लाख 28 हजार रुपये की ठगी की गई थी। आरोपियों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को डराया-धमकाया और जांच के नाम पर रकम ट्रांसफर कराने के लिए मजबूर किया। पीड़ित ने भयवश 25 से 29 अक्टूबर 2025 के बीच 12 किस्तों में रकम विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर दी।

इस पूरे मामले के खुलासे में एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देश पर एडिशनल एसपी अनिल सोनी, सीएसपी मयंक मिश्रा, डीएसपी साइबर उन्नति ठाकुर सहित थाना पुसौर एवं साइबर टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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