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April 2, 2026 3:25 am

31 दिनों में टूटा नक्सल नेटवर्क, मिशन 2026 अंतिम चरण में

170 आत्मसमर्पण, 343 हथियार बरामद, करोड़ों की नकदी-सोना जब्त

“आईजी सुन्दरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि बस्तर अब ऐतिहासिक बदलाव के दौर में है। वर्षों से प्रभावित क्षेत्र अब शांति, विकास और विश्वास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि नक्सल-मुक्त बस्तर का लक्ष्य अब बहुत करीब है”

छत्तीसगढ़ ,बस्तर।बस्तर संभाग में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे मिशन 2026 ने निर्णायक मुकाम हासिल कर लिया है। पिछले 31 दिनों में सुरक्षा बलों और प्रशासन के संयुक्त अभियान से न केवल माओवादी तंत्र कमजोर हुआ है, बल्कि नक्सल-मुक्त बस्तर का लक्ष्य अब लगभग साकार होता दिख रहा है।

एक नजर में बड़ी उपलब्धियां

• 170 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण, मुख्यधारा में वापसी

• DKSZCM पापाराव सहित कई DVCM स्तर के कैडर ढेर/समर्पित

• 343 से अधिक आधुनिक हथियार बरामद — AK-47, INSAS, SLR, BGL, LMG

• 6.75 करोड़ नकद और 8 किलो सोना बरामद

• 27 महीनों में 2700+ माओवादी पुनर्वासित

सुरक्षा बलों का संयुक्त प्रहार

इस सफलता के पीछे सुरक्षा बलों और एजेंसियों का अभूतपूर्व समन्वय रहा डीआरजी , एसटीएफ , कोबरा , बस्तर फाइटर्स, सीआरपीएफ , बीएसएफ़ , आइटीबीपी , एसएसबी , सीएएफ ,साथ ही स्थानीय प्रशासन और सभी हितधारकों ने मिलकर अभियान को अंजाम दिया।

आर्थिक और सैन्य ढांचा ध्वस्त

सुरक्षा बलों द्वारा लगातार डंप रिकवरी और हथियार बरामदगी से माओवादियों का आर्थिक और सैन्य आधार लगभग खत्म हो चुका है। एक ही महीने में करोड़ों की नकदी और सोने की बरामदगी को बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

पुनर्वास से बदल रही तस्वीर

पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन योजना के तहत बड़ी संख्या में माओवादी हिंसा छोड़कर सामान्य जीवन अपना रहे हैं। इससे बस्तर में शांति और विश्वास का माहौल मजबूत हुआ है।

आईजी बस्तर सुंदरराज पी का बयान

आईजी सुन्दरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि छत्तीसगढ़ का बस्तर अब ऐतिहासिक बदलाव के दौर में है। वर्षों से प्रभावित क्षेत्र अब शांति, विकास और विश्वास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि नक्सल-मुक्त बस्तर का लक्ष्य अब बहुत करीब है

लगातार कार्रवाई, आत्मसमर्पण और संसाधनों की बरामदगी से माओवादी संगठन अंतिम चरण में पहुंच चुका है। मिशन 2026 अब बस्तर को स्थायी शांति और विकास की नई पहचान देने की दिशा में निर्णायक साबित हो रहा है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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