बिलासपुर। मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्रेणी बी के पद पर पदोन्नति हेतु राजस्व राजस्व निरीक्षकों को अनुभव में एक साल की छूट दी गई। इसका विरोध करते हुए मुख्य नपा अधिकारी श्रेणी सी के पद पर पदस्थ याचिकाकर्ताओं की याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी।
कोर्ट ने कहा कि, राज्य सरकार द्वारा छूट देने की यह शक्ति, जिसे एक ‘वन-टाइम उपाय’ के तौर पर इस्तेमाल किया गया है, पूरी तरह से उचित है। हमें ऐसा कोई भी साक्ष्य नहीं मिला है जिससे यह कहा जा सके कि राज्य सरकार द्वारा इस्तेमाल की गई यह छूट देने की शक्ति या तो मनमानी है, या रिकॉर्ड के विपरीत है। या फिर इसका इस्तेमाल किसी बाहरी या अनुचित विचार के आधार पर किया गया है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि, 2017 के नियमों के नियम 14 और 15 के तहत बनी अनुसूची (4) का कॉलम (3) संवैधानिक रूप से वैध कानून है और इसकी संवैधानिकता को दी गई चुनौती को इसके द्वारा खारिज किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा 2 फरवरी-2018 के आदेश के माध्यम से प्रयोग की गई छूट देने की शक्ति। राज्य शासन ने अपने आदेश में कहा था कि, मुख्य नगर पालिका अधिकारी ‘ख’ (बी) वर्ग के रिक्त पदों पर पदोन्नति हेतु छत्तीसगढ़ राज्य नगरपालिका सेवा, भर्ती तथा सेवा की शर्तें नियम, 2017 की अनुसूची-चार के सरल क्रमांक 3 में उल्लेखित राजस्व निरीक्षक की उच्चतर पद पर पदोन्नति हेतु अर्हता होने के लिये न्यूनतम कालावधि 6 वर्ष में केवल एक बार के लिए 1 वर्ष की छूट प्रदान करता है। इस आदेश को ही याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दी थी।
कोर्ट ने सुनवाई के बाद यह कहा कि, याचिकाकर्ताओं ने रिकॉर्ड पर कोई वास्तविक और ठोस सामग्री पेश नहीं की है जिससे यह साबित हो सके कि उन्हें कोई नुकसान हुआ है। उन्होंने केवल अस्पष्ट दलीलें दी हैं, जिनके समर्थन में कोई सामग्री नहीं है, यह दिखाने के लिए कि, क्वालिफाइंग सेवा में एक साल की छूट देने से उन्हें कोई नुकसान हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने संदीप कुमार शर्मा (उपर्युक्त) मामले में यह माना है कि छूट से संबंधित नियम की व्याख्या उदार तरीके से की जानी चाहिए।
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