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June 11, 2026 10:41 pm

बस्तर की नई वैश्विक पहचान : जंगलों में फेंके जाने वाले छिंद के बीजों से तैयार हुई अनोखी हर्बल कॉफी युवा उद्यमी विशाल हालदार का कमाल, कचरे से कंचन बनाने के नवाचार को मुख्यमंत्री ने भी सराहा

रायपुर, 08 मई 2026। बस्तर अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता और जनजातीय संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि एक अनोखे नवाचार के कारण भी देश-दुनिया में पहचान बना रहा है। दंतेवाड़ा जिले के बचेली निवासी युवा नवाचारी विशाल हालदार ने जंगलों में व्यर्थ फेंक दिए जाने वाले छिंद (खजूर की स्थानीय प्रजाति) के बीजों से कैफीन-मुक्त हर्बल कॉफी तैयार कर एक नई मिसाल पेश की है।

यह हर्बल कॉफी स्वास्थ्यवर्धक होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। छिंद, खजूर और पाम प्रजाति के बीजों से तैयार यह पेय पूरी तरह कैफीन-मुक्त है, जिससे यह अनिद्रा, उच्च रक्तचाप और एसिडिटी से पीड़ित लोगों के लिए बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है।

कचरे से कंचन तक का सफर

बीकॉम और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की पढ़ाई कर चुके विशाल हालदार ने करीब दो वर्षों तक शोध कर इस उत्पाद को विकसित किया। बस्तर के जंगलों में बड़ी मात्रा में उपलब्ध छिंद के बीज अब तक बेकार समझकर फेंक दिए जाते थे, लेकिन विशाल ने इन्हीं बीजों को उपयोग में लाकर एक नया उत्पाद तैयार किया है।

विशाल के अनुसार इस हर्बल कॉफी में प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो इसे सामान्य कॉफी की तुलना में अधिक स्वास्थ्यवर्धक बनाते हैं। इसका स्वाद और सुगंध भी लोगों को आकर्षित कर रही है।

मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित

विशाल हालदार के इस अभिनव प्रयास को शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय, जगदलपुर में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ” में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने उन्हें सम्मानित कर इस नवाचार की सराहना की। वित्त मंत्री O. P. Choudhary सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भी कॉफी के स्वाद और गुणवत्ता की प्रशंसा की।

रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई राह

विशाल हालदार का उद्देश्य केवल एक उत्पाद तैयार करना नहीं, बल्कि बस्तर के युवाओं को रोजगार और उद्यमिता से जोड़ना भी है। दंतेवाड़ा जिला प्रशासन के सहयोग से स्थानीय युवाओं को इस प्रोजेक्ट से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

इस पहल से गांवों और जंगलों से छिंद के बीज एकत्र करने वाले ग्रामीणों को अतिरिक्त आय का नया स्रोत मिलेगा। स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर वैश्विक स्तर का उत्पाद तैयार करने की यह पहल आत्मनिर्भर भारत की सोच को भी मजबूती दे रही है।

जल्द होगी बाजार में लॉन्चिंग

विशाल ने बताया कि खजूर और छिंद के बीजों में फेनोलिक यौगिक और ओलिक एसिड जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो हृदय स्वास्थ्य और पाचन तंत्र के लिए लाभकारी माने जाते हैं। वर्तमान में यह प्रोजेक्ट परीक्षण और विकास के अंतिम चरण में है तथा जल्द ही इसकी आधिकारिक लॉन्चिंग की जाएगी।

बस्तर की यह अनोखी हर्बल कॉफी आने वाले समय में स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच एक विशेष पहचान बना सकती है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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