बिलासपुर . हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की खंडपीठ ने राज्य शासन को रायगढ़ जिले में जिंदल स्टील को आवंटित कोल ब्लॉक गारे 4/6 का माइनिंग प्लान दो सप्ताह में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। खंडपीठ ने यह निर्देश याचिका कर्ताओं कि इस मांग पर दिए कि अगर शासन यह कह रहा है कि साथ ही अधिकार का अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण नहीं है और भूमि का मालिकाना हक प्रभावित किसानों के नाम ही रहेगा और खनन के बाद जमीन वापस की जाएगी। आता जमीन वापस दिए जाने की पूरी कार्य योजना प्रस्तुत की जानी चाहिए क्योंकि ब्लॉक के खुली खदान का हिस्सा 23 साल में ही समाप्त हो जाएगा और 11 साल बाद भूमिगत खदान भी समाप्त हो जाएगी अतः अधिकांश जमीन तो 23 साल में ही वापस की जा सकती है।
कोल ब्लॉक भूमि अधिग्रहण से प्रभावित चंदन सिंह सिदार समेत 49 किसानों के द्वारा याचिका दाखिल करके भू राजस्व संहिता की धारा 247 को संवैधानिक ठहरने की मांग की गई थी क्योंकि इसमें नया भूमि अधिग्रहण कानून आने के बाद भी भूमि अधिग्रहण के लिए उपयोग किया जा रहा है जो कि संविधान के अनुसार अब नहीं किया जा सकता। याचिका कर्ताओं ने याचिका में बताया है की नई भूमि अधिग्रहण कानून में बहुत से प्रावधान किसानों के हितों की रक्षा करते हैं जिसमें सामाजिक प्रभाव अध्ययन पुनर्वास और पुनर्स्थापना के विस्तृत योजना यह सब चीज भू राजस्व संहिता की धारा 247 में नहीं है। इसी कारण भू राजस्व संहिता के तहत साथी अधिकार अधिकरण से किसानों को कई तरह का नुकसान होता है और साथ ही अधिकार के नाम पर भूमि अधिग्रहण कर लिया जाता है।
राज्य शासन में अपने जवाब में यह कहा था कि इस अधिग्रहण को भूमि अधिग्रहण नहीं माना जा सकता और यह केवल साथ ही अधिकार का अधिग्रहण है जिसे खनन पश्चात भूमि को वापस किया जाएगा। हालांकि ऐसा कहते हुए राज्य शासन ने कोई समय सीमा या भूमि वापसी की कोई योजना प्रस्तुत नहीं की थी।
आज हुई बहस में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने खंडपीठ को बताया संविधान के अनुच्छेद 245 246 और 254 के प्रावधानों के तहत संसद द्वारा पारित नया भू अधिग्रहण कानून आने के बाद भू राजस्व संहिता की धारा 247 असंवैधानिक हो गई है। और इसके तहत किया गया अधिग्रहण अवैध है। हालांकि राज्य सरकार इस भूमि अधिग्रहण के बजाय साथ ही अधिकार का अधिग्रहण का कर जमीन वापस करने की बात कह रही है जिसकी कोई विस्तृत कार्य योजना प्रस्तुत नहीं है। पर्यावरण अनुमति के हिसाब से 23 साल में खुली खदान और 34 साल में भूमिगत खदान समाप्त हो जाएगी तो माइनिंग प्लान के हिसाब से प्रभावित जमीन है 5 साल 10 साल 15 साल और 23 साल में वापस की जा सकती है। राज्य सरकार की ओर से उपस्थित अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने धारा 247 की संवैधानिकता का बचाव करते हुए कहा कि यह भूमि अधिग्रहण नहीं है अतः किसानों की याचिका में जो अनुतोष मांगा गया है वह दिया नहीं जा सकता। जिंदल स्टील के तरफ से भी वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अय्यर उपस्थित हुए।
सुनवाई के पश्चात खंडपीठ ने राज्य सरकार को खदान का माइनिंग प्लान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जिससे के यह साफ हो सके तो किसी वक्त कौन सी जमीन खनन से मुक्त हो जाएगी और वापस की जा सकती है । मामले की अगली सुनवाई 2 सप्ताह बाद होगी।
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