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February 3, 2026 3:58 pm

भारतीय ज्ञान परंपरा का पाठ्यक्रम में एकीकरण शैक्षणिक पुनर्जागरण की दिशा में अहम कदम : प्रो. कविता होले

वर्धा।महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं शिक्षा मंत्रालय के भारतीय ज्ञान परंपरा विभाग के सहयोग से भारतीय ज्ञान परंपरा का पाठ्यक्रम में एकीकरण विषय पर आयोजित छह दिवसीय बुनियादी प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ ग़ालिब सभागार में हुआ।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कवि कुलगुरु कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय, रामटेक की संस्कृत भाषा एवं साहित्य की अधिष्ठाता तथा कार्यक्रम की पर्यवेक्षक प्रो. कविता होले ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत रोजगारोन्मुख शिक्षा को सशक्त बनाने के उद्देश्य से भारतीय ज्ञान परंपरा को पाठ्यक्रम में शामिल करने का यह प्रयास शैक्षणिक पुनर्जागरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में भारतीयता का आत्मबोध विकसित होगा और नवाचार को भी प्रोत्साहन मिलेगा।

इस अवसर पर सेंट विंसेंट पालोती इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी महाविद्यालय नागपुर के सहायक प्राध्यापक एवं यूजीसी मास्टर ट्रेनर डॉ. प्रफुल्ल तरवटकर ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षक केंद्र के निदेशक एवं साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. अवधेश कुमार ने बताया कि भारतीय चिंतन परंपरा को समकालीन पाठ्यक्रम से जोड़ना इस प्रशिक्षण का प्रमुख उद्देश्य है जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति की परिकल्पना के अनुरूप तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि इसमें आयुर्वेद विज्ञान एवं तकनीकी विषयों को भी सम्मिलित किया गया है।

02 से 07 फरवरी तक चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अध्यापकों एवं शोधार्थियों के साथ-साथ अन्य राज्यों से आए 40 से अधिक अध्यापक एवं शोधार्थी सहभागिता कर रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिदिन चार व्याख्यान आयोजित किए जाएंगे तथा अंतिम दिन परीक्षा भी ली जाएगी।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर एवं कुलगीत के साथ किया गया। अतिथियों का स्वागत स्मृति चिह्न शॉल श्रीफल एवं सुतमाला भेंट कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन जनसंचार विभाग के सहायक प्राध्यापक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. संदीप कुमार वर्मा ने किया जबकि दर्शन एवं संस्कृति विभाग के सहायक प्राध्यापक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रणंजय कुमार सिंह ने आभार व्यक्त किया।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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