CBN36 रायगढ़। शेयर ट्रेडिंग में मोटा मुनाफा दिलाने का झांसा देकर रायगढ़ के एक डॉक्टर से 34 लाख 17 हजार 531 रुपये की साइबर ठगी करने वाले गिरोह के एक और आरोपी को रायगढ़ पुलिस ने इंदौर से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान रईस खान (31 वर्ष) के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से ठगी की रकम से खरीदी गई टाटा नेक्सॉन कार, लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन और 1 लाख 39 हजार 500 रुपये नकद सहित करीब 12 लाख रुपये की संपत्ति जब्त की है।
एसएसपी शशि मोहन सिंह के निर्देशन में साइबर थाना रायगढ़ की टीम ने यह कार्रवाई की। आरोपी को इंदौर न्यायालय से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर रायगढ़ लाया गया, जहां न्यायालय में पेश करने के बाद उसे जेल भेज दिया गया।
पुलिस के मुताबिक, जूटमिल क्षेत्र के सोनकरपारा निवासी डॉ. दिलीप कुमार मिश्रा ने 27 मई 2026 को साइबर थाना रायगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि मार्च 2025 में मोबाइल के माध्यम से सुनील नामक व्यक्ति ने उनसे संपर्क किया और स्पार्टन ट्रेड कंपनी में निवेश करने पर भारी मुनाफा दिलाने का झांसा दिया। इसके बाद व्हाट्सऐप के जरिए फर्जी पोर्टफोलियो भेजकर निवेश पर लगातार बढ़ता हुआ लाभ दिखाया गया। अलग-अलग मोबाइल नंबरों से संपर्क कर डॉक्टर को निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाता रहा।
आरोपियों के झांसे में आकर डॉक्टर ने 28 अप्रैल 2025 से 3 अप्रैल 2026 के बीच अलग-अलग बैंक खातों में कुल 34 लाख 17 हजार 531 रुपये जमा कर दिए। शुरुआत में पोर्टफोलियो में मुनाफा दिखाया जाता रहा, लेकिन जब उन्होंने अपनी रकम निकालने का प्रयास किया तो पैसे वापस नहीं मिले। इसके उलट उनसे और निवेश करने का दबाव बनाया जाने लगा। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की।
मामले में साइबर थाना रायगढ़ ने अपराध क्रमांक 06/2026 के तहत धारा 318(4), 3(5) बीएनएस में अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजेक्शन की जांच के दौरान पुलिस को इंदौर में सक्रिय गिरोह के तार मिले।
इससे पहले पुलिस ने इंदौर के पलासिया क्षेत्र से तनिषा पाटिल, विजय नगर क्षेत्र से ज्योति मालवीय और परदेशीपुरा क्षेत्र से तरुण नागर को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि ज्योति मालवीय के आधार कार्ड से जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल साइबर ठगी में किया जा रहा था। उसने तरुण नागर के माध्यम से करीब 100 से 150 सिम कार्ड गिरोह को उपलब्ध कराए थे। तनिषा पाटिल की भूमिका भी सिम कार्ड उपलब्ध कराने में सामने आई थी।
इसी कड़ी में पुलिस ने इंदौर के कावेरी परिसर से रईस खान को गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पिछले करीब दो वर्षों से इंदौर में रहकर शेयर मार्केट एडवाइजरी का काम कर रहा था। एक ब्रोकिंग कंपनी में सब-ब्रोकर के रूप में काम करते हुए वह लोगों को ट्रेडिंग अकाउंट में निवेश कर अधिक लाभ कमाने का लालच देता था। इस काम के लिए उसने तरुण नागर से करीब 100 से 150 सिम कार्ड खरीदे थे।
पुलिस के अनुसार, आरोपी रईस खान ने 24 जून 2025 को डॉ. दिलीप मिश्रा को चार बार फोन कर डीमैट अकाउंट खुलवाने और शेयर ट्रेडिंग में अधिक मुनाफा दिलाने का प्रलोभन दिया था। इसके बाद डॉक्टर से अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराई गई। आरोपी ने पूछताछ में ठगी की रकम से नवंबर 2025 में टाटा नेक्सॉन कार, मोबाइल और लैपटॉप खरीदने की बात स्वीकार की है।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से एक टाटा नेक्सॉन कार, एक लैपटॉप, वनप्लस, रियलमी और आईफोन सहित तीन मोबाइल फोन, दो एटीएम कार्ड, एक क्रेडिट कार्ड, आधार कार्ड और 1 लाख 39 हजार 500 रुपये नकद जब्त किए हैं। जब्त संपत्ति की कुल कीमत करीब 12 लाख रुपये बताई गई है।
इस कार्रवाई में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक, निरीक्षक विमल राय, आरक्षक पुष्पेन्द्र जाटवर, धर्मेन्द्र सिंह, जितेन्द्र कुर्रे, विकास प्रधान तथा महिला आरक्षक जयलक्ष्मी और मनीषा साहू की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने लोगों से अपील की है कि शेयर ट्रेडिंग और निवेश में अधिक मुनाफे का लालच देने वाले अनजान लोगों पर भरोसा न करें। किसी को भी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या मोबाइल सिम उपलब्ध न कराएं। साइबर ठगी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
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