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November 3, 2026 2:26 pm

इंद्रावती के कछार से सहकारिता के शीर्ष तक पहुंचे धनसिंह बघेल, मिलेगा ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार

चित्रकोट की मछुआ सहकारी समिति ने बदली 62 परिवारों की जिंदगी, मत्स्य पालन और नौका विहार से सालाना 10 लाख रुपये का शुद्ध लाभ

CBN36 रायपुर। बस्तर के सहकारिता क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले जगदलपुर के चित्रकोट निवासी धनसिंह बघेल को राज्य के प्रतिष्ठित ‘ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन ने सहकारिता के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों और ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों को देखते हुए इस सम्मान के लिए उनका चयन किया है। उनके नेतृत्व में संचालित प्राथमिक कुडुक मछुआ एवं नौका विहार सहकारी समिति मर्यादित आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामूहिक स्वावलंबन की मिसाल बन चुकी है।

42 सदस्यों से हुई थी समिति की शुरुआत

इंद्रावती नदी के तट पर बसे बस्तर अंचल में ग्रामीणों की आजीविका कभी पारंपरिक मछली पकड़ने, वनोपज संग्रहण और सीमित कृषि पर निर्भर थी। इसी स्थिति को बदलने के उद्देश्य से धनसिंह बघेल ने वर्ष 2009 में मत्स्य पालन विभाग के मार्गदर्शन में महज 42 सदस्यों के साथ सहकारी समिति की स्थापना की। शुरुआती चुनौतियों के बावजूद उन्होंने ग्रामीणों को संगठित कर आजीविका के नए अवसर विकसित किए।

वर्ष 2014 से समिति ने चित्रकोट सिंचाई जलाशय और ग्राम पंचायत के रावन मुंडा क्षेत्र को पट्टे पर लेकर मत्स्य पालन का कार्य शुरू किया। इसके साथ ही चित्रकोट जलप्रपात के पर्यटन महत्व को देखते हुए सहकारिता विभाग के सहयोग से नौका विहार की सुविधा भी शुरू की। मत्स्य पालन और पर्यटन को जोड़ने की इस पहल ने समिति की आर्थिक स्थिति को नई मजबूती दी।

मत्स्य पालन और नौका विहार से लाखों की आय

वर्तमान में समिति में 62 सदस्य हैं, जिनमें 41 पुरुष और 21 महिलाएं शामिल हैं। समिति द्वारा जलाशय से प्रतिवर्ष लगभग 1,980 किलोग्राम और नदी से 3,600 किलोग्राम मछली का उत्पादन किया जा रहा है। इससे करीब 9.5 लाख रुपये की आय प्राप्त होती है। वहीं, पर्यटकों को नौका विहार की सुविधा उपलब्ध कराकर सालाना लगभग 8 लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी हो रही है।

समिति का औसत वार्षिक शुद्ध लाभ लगभग 10 लाख रुपये तक पहुंच गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में समिति ने 8 लाख 32 हजार 985 रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। यह उपलब्धि ग्रामीणों की सामूहिक मेहनत, बेहतर प्रबंधन और सहकारिता की ताकत को दर्शाती है।

अपने संसाधनों से खड़ा किया आत्मनिर्भरता का मॉडल

समिति के पास पर्यटकों की सुरक्षा के लिए 250 लाइफ जैकेट, सात नावें और आधुनिक उपकरण उपलब्ध हैं। शासन की शुरुआती योजनाओं और अनुदानों से मिली सहायता के बाद समिति ने अपनी आर्थिक मजबूती के दम पर कई महत्वपूर्ण सुविधाएं स्वयं विकसित की हैं। मछली अवतरण के लिए लैंडिंग सेंटर का निर्माण कराया गया है, वहीं मछलियों के परिवहन के लिए पिकअप वाहन भी खरीदा गया है।

62 परिवारों के जीवन में आया बदलाव

इस सहकारी मॉडल का सबसे बड़ा लाभ समिति से जुड़े 62 परिवारों को मिला है। मत्स्य पालन और नौका विहार से होने वाली आमदनी ने इन परिवारों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है। अब सदस्य मोटरसाइकिल जैसी सुविधाएं जुटाने के साथ अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने में भी सक्षम हो रहे हैं।

धनसिंह बघेल के नेतृत्व में चित्रकोट की इस समिति ने साबित किया है कि स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग, सामूहिक प्रयास और पर्यटन के साथ सहकारिता का समन्वय ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक बदलाव का प्रभावी माध्यम बन सकता है। ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार के लिए उनका चयन न केवल उनके व्यक्तिगत योगदान का सम्मान है, बल्कि पूरे बस्तर अंचल की सहकारिता और ग्रामीण स्वावलंबन की उपलब्धि भी है। इस उपलब्धि से क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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