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November 3, 2026 2:32 pm

छत्तीसगढ़ के 26 वर्ष : संघर्ष, संकल्प और सर्वांगीण विकास की स्वर्णिम गाथा

(धनंजय राठौर संयुक्त संचालक, जनसंपर्क, रायपुर)

CBN36 रायपुर ।एक नवंबर 2000 को मध्यप्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ भारत के 26वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण का सपना साकार हुआ। राज्य गठन के समय सीमित संसाधनों, प्रशासनिक चुनौतियों और विकास की अनेक बाधाओं के बीच एक नई पहचान गढ़ने की चुनौती थी। आज 26 वर्षों की विकास यात्रा पूरी करते हुए छत्तीसगढ़ ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, दूरदर्शी नेतृत्व और जनभागीदारी के माध्यम से किसी भी प्रदेश की तस्वीर और तकदीर बदली जा सकती है।

बजट और अर्थव्यवस्था में ऐतिहासिक विस्तार

राज्य गठन के शुरुआती दौर में लगभग 7 से 8 हजार करोड़ रुपये के बजट से विकास यात्रा शुरू करने वाले छत्तीसगढ़ का बजट आज बढ़कर 1.72 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह राज्य की आर्थिक मजबूती और विकास की गति को दर्शाता है।

देश के ‘धान का कटोरा’ के रूप में प्रसिद्ध छत्तीसगढ़ आज अपनी समृद्ध खनिज संपदा, कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, इस्पात, सीमेंट और ऊर्जा उत्पादन के बूते देश के औद्योगिक मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान रखता है। औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार और निवेश की नई संभावनाओं ने राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा और गति प्रदान की है।

महिला सशक्तिकरण : आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

महिला सशक्तिकरण मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। महतारी वंदन योजना के तहत अब तक 31 किस्तों में लगभग 68 लाख पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे अंतरित की जा चुकी है।

प्रदेश में 13.85 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। बिहान मिशन के अंतर्गत 31 लाख से अधिक गरीब परिवारों की महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से संपत्ति की रजिस्ट्री पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टाम्प शुल्क में एक प्रतिशत की रियायत भी दी गई है।इन पहलों से महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने के साथ-साथ परिवार और समाज में उनकी भूमिका भी मजबूत हुई है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत : हमारे किसान

छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का आधार कृषि और किसान हैं। राज्य सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत प्रदेश में अब तक 24.40 लाख आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। औसतन प्रतिदिन लगभग 1,600 आवासों का निर्माण पूरा किया जा रहा है। पुराने और नए स्वीकृत आवासों को मिलाकर बीते ढाई वर्षों में 11 लाख से अधिक आवास हितग्राहियों को सौंपे जा चुके हैं।

किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से प्रति एकड़ 21 क्विंटल तक धान बेचने की सुविधा दी गई है। खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में 25.24 लाख किसानों से 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई। समर्थन मूल्य और कृषक उन्नति योजना के माध्यम से किसानों को लगभग 43,723 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की गई।

धान खरीदी व्यवस्था में ऑनलाइन टोकन, बायोमेट्रिक सत्यापन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी तकनीकी सुविधाओं ने प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुविधाजनक बनाया है।

बस्तर संभाग के दूरस्थ, दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए भी महत्वपूर्ण पहल की गई है। क्षेत्र की 485 बसाहटों को सड़क संपर्क से जोड़ने की स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अतिरिक्त 280 अन्य बसाहटों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने के लिए 804.06 करोड़ रुपये की लागत वाले 263 सड़क कार्यों के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। नक्सलवाद के विरुद्ध निर्णायक अभियान के साथ-साथ विकास कार्यों को गति देने और दूरस्थ गांवों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने के प्रयास लगातार जारी हैं।

आधारभूत संरचना और संपर्क सुविधाओं का विस्तार

बीते 26 वर्षों में छत्तीसगढ़ के आधारभूत ढांचे में व्यापक बदलाव आया है। ग्रामीण सड़क नेटवर्क के विस्तार से लेकर राजधानी रायपुर और नवा रायपुर (अटल नगर) जैसी आधुनिक शहरी बसाहटों के विकास तक प्रदेश ने लंबी दूरी तय की है। ग्रामीण सड़क नेटवर्क में लगभग 98 गुना वृद्धि इस परिवर्तन का महत्वपूर्ण उदाहरण है।

दूरस्थ आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों तक बिजली, पेयजल, पक्की सड़कें, मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट जैसी सुविधाओं का विस्तार हुआ है। इससे गांवों और शहरों के बीच की दूरी कम हुई है और विकास के नए अवसर खुले हैं।

नवा रायपुर में डेटा सेंटर और आधुनिक तकनीक आधारित परियोजनाओं के माध्यम से प्रदेश को नई अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार सुशासन, वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत बनाने पर भी जोर दे रही है।

औद्योगिक विकास के साथ रोजगार सृजन और युवाओं के लिए नए अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा, टेक्सटाइल और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत 450 से अधिक सुधार लागू किए हैं। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट, 2026 लागू करने वाला राज्य देश का पहला राज्य बना है। जन विश्वास सुधारों के माध्यम से 279 छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर किया गया है। वन-क्लिक सिंगल विंडो व्यवस्था, सरल भूमि डायवर्जन प्रक्रिया और रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण जैसी व्यवस्थाओं से औद्योगिक और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है।

नई औद्योगिक विकास नीति 2024-30 के लागू होने के बाद प्रदेश को 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों के माध्यम से 1.72 लाख से अधिक संभावित रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है।

शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक विकास

किसी भी राज्य की प्रगति का वास्तविक आधार शिक्षा, स्वास्थ्य और मानव संसाधन का विकास होता है। पिछले 26 वर्षों में छत्तीसगढ़ ने इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।

प्रदेश की साक्षरता दर बढ़कर लगभग 79 प्रतिशत तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ जिला अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। इससे आम नागरिकों को अपने क्षेत्र के नजदीक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिली है।इसके साथ ही बिहान जैसी योजनाओं के माध्यम से लाखों महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर आजीविका और आर्थिक स्वावलंबन के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।

मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार

राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नवा रायपुर क्षेत्र में मेडिसिटी हब विकसित किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत 5,000 बिस्तरों वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की योजना है।रायपुर के डॉ. भीमराव अंबेडकर स्मृति चिकित्सालय (मेकाहारा) में 700 बिस्तरों के अस्पताल तथा प्रदेश में चार नए मेडिकल कॉलेजों के विस्तार की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

इसके अलावा शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना, श्री धन्वंतरी जेनेरिक मेडिकल स्टोर योजना, दाई-दीदी मोबाइल क्लीनिक योजना और बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (चिरायु) जैसी योजनाओं के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बढ़ाया जा रहा है।

‘स्वस्थ छत्तीसगढ़’ की परिकल्पना हो रही साकार

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय का कहना है कि चिकित्सा सेवाओं के विस्तार को गति देते हुए गुणवत्तापूर्ण उपचार की उपलब्धता दूरस्थ क्षेत्रों तक सुनिश्चित की जा रही है। स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत बनाने और चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के माध्यम से ‘स्वस्थ छत्तीसगढ़’ की परिकल्पना को साकार किया जा रहा है। यह पहल ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के लक्ष्य को हासिल करने का महत्वपूर्ण आधार बनेगी।

उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्य में भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), ट्रिपल आईटी, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी), अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) और विधि विश्वविद्यालय जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं की स्थापना से युवाओं के लिए उच्च शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध हुए हैं। स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में भी विस्तार हुआ है, हालांकि गुणवत्ता और पहुंच के स्तर पर अभी और प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।

सुरक्षा, शांति और बस्तर की नई सुबह

छत्तीसगढ़ के विकास की राह में लंबे समय तक नक्सलवाद सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक रहा है। पिछले कुछ वर्षों में नक्सलवाद के विरुद्ध सुरक्षा बलों ने निर्णायक और प्रभावी अभियान चलाए हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में नए सुरक्षा शिविरों की स्थापना के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

सुरक्षा और विकास के समन्वित प्रयासों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बदलाव की नई तस्वीर उभर रही है। बस्तर और सरगुजा के दूरस्थ अंचलों में सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और संचार सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। इससे स्थानीय नागरिकों में विश्वास बढ़ा है और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के नए अवसर पैदा हुए हैं।

बस्तर के जंगलों में स्थापित सुरक्षा शिविर अब केवल सुरक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि आसपास के ग्रामीणों के लिए सेवा और विकास के केंद्र के रूप में भी विकसित हो रहे हैं। दूरस्थ गांवों में सार्वजनिक परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा शुरू की गई है। इसके साथ ही सड़क, पुल, मोबाइल नेटवर्क, उचित मूल्य दुकान, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और आंगनबाड़ी जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।

संस्कृति और आधुनिकता का अनूठा संगम

छत्तीसगढ़ ने विकास की आधुनिक यात्रा के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों और जनजातीय विरासत को भी पूरी संवेदनशीलता के साथ सहेजकर रखा है। बस्तर की लोक संस्कृति, कर्मा और सुआ नृत्य, पारंपरिक त्योहार, छत्तीसगढ़ी भाषा, खानपान और लोककलाएं प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं।

हरेली जैसे पारंपरिक त्योहारों से लेकर सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत तक, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता उसकी पहचान को समृद्ध बनाती है। राज्योत्सव जैसे आयोजनों और डिजिटल माध्यमों के जरिए स्थानीय कला, शिल्प और परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है।

नवा रायपुर (अटल नगर) में निर्मित शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय प्रदेश की जनजातीय विरासत और स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को सहेजने की महत्वपूर्ण पहल है। संग्रहालय में 14 से 15 विषय आधारित दीर्घाएं बनाई गई हैं। इनमें बस्तर की घोटुल परंपरा, पारंपरिक कृषि, शिकार, चिकित्सा पद्धति, लोकनृत्य और नवाखानी तथा उरिदखानी जैसी परंपराओं को प्रदर्शित किया गया है।

यह संग्रहालय हलबा विद्रोह, परलकोट विद्रोह, भूमकाल आंदोलन और रानी चो-रिस जैसे ऐतिहासिक जनजातीय संघर्षों तथा वीरों की गाथाओं को वर्चुअल रियलिटी और वीएफएक्स तकनीक के माध्यम से जीवंत करता है।

संग्रहालय में जनजातीय समुदायों के पारंपरिक वाद्ययंत्रों, आवास, घरेलू एवं कृषि उपकरणों, शिकार के साधनों और पारंपरिक तकनीकों का भी प्रदर्शन किया गया है। आग जलाने, लौह निर्माण, रस्सी बनाने, फसल की मिंजाई, कत्था निर्माण, चिवड़ा-लाई तैयार करने, मंद आसवन, अन्न कुटाई-पिसाई और तेल प्रसंस्करण जैसी पारंपरिक विधियों को भी दर्शाया गया है।

इसके अलावा अबुझमाड़िया समुदाय की घोटुल परंपरा, भुंजिया जनजाति के लाल बंगला और जनजातीय समुदायों की बांसकला, काष्ठकला, चित्रकारी, गोदना कला तथा अन्य शिल्प परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन इस संग्रहालय को विशेष बनाता है।

विकसित और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण की ओर अग्रसर

छत्तीसगढ़ के पास अपने प्राकृतिक, कृषि और मानव संसाधनों को आर्थिक अवसरों में बदलने की अपार क्षमता है। राज्य का लक्ष्य किसानों को समृद्ध बनाना, महिलाओं को आत्मनिर्भर करना और युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करना है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इसी लक्ष्य के अनुरूप प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ‘छत्तीसगढ़ अंजोर विजन 2047’ के तहत विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण की दिशा में कार्य कर रही है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 : नागरिक संतुष्टि और समाधान सर्वोपरि

सुशासन का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होता है, जब आम नागरिक की समस्याओं का समयबद्ध और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 का मूल उद्देश्य भी संवेदनशीलता, समयबद्धता और प्रभावी समाधान की भावना को मजबूत करना है।

इस व्यवस्था का लक्ष्य है कि प्रत्येक नागरिक को यह भरोसा हो कि सरकार तक पहुंचाई गई उसकी बात सुनी जाएगी और नियमानुसार उसका समाधान भी किया जाएगा।

शासकीय कार्यालयों में आने वाले प्रत्येक नागरिक के साथ सम्मानजनक और संवेदनशील व्यवहार होना चाहिए। उसकी समस्या को गंभीरता से सुनकर समयबद्ध जवाब दिया जाना चाहिए। यदि नियमानुसार कार्य संभव है, तो उसमें अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। वहीं, यदि किसी कारणवश कार्य संभव नहीं है, तो नागरिक को स्पष्ट रूप से कारण बताया जाना चाहिए।

नागरिकों को बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, यह सुशासन की महत्वपूर्ण कसौटी है। अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यों का मूल्यांकन केवल प्रशासनिक उपलब्धियों से ही नहीं, बल्कि आम जनता के प्रति उनके व्यवहार और संवेदनशीलता से भी किया जाना चाहिए।

26 वर्षों की यात्रा और विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प

छत्तीसगढ़ की 26 वर्षों की विकास यात्रा संघर्ष, संकल्प और उपलब्धियों की प्रेरक गाथा है। राज्य ने भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हुए विकास के अनेक नए आयाम स्थापित किए हैं। कृषि, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण, आधारभूत संरचना और सुशासन के क्षेत्र में हुई प्रगति ने प्रदेश को नई पहचान दी है।

हालांकि, यह विकास यात्रा अभी जारी है। किसानों की समृद्धि, युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर, शिक्षा और स्वास्थ्य की गुणवत्ता में सुधार तथा शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना अभी भी महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं हैं।

‘विकसित छत्तीसगढ़’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ता यह राज्य अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संसाधनों और जनशक्ति के बल पर भविष्य की नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। विश्वास है कि आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ देश के विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर राज्यों में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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