पेवर ब्लॉक निर्माण में कथित अनियमितताओं का मामला, 7 अभियंताओं के विरुद्ध जारी कारण बताओ नोटिस पर भी अंतरिम रोक
CBN36 बिलासपुर। नगर पालिक निगम भिलाई की परियोजना शाखा के अंतर्गत पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं के मामले में निगम के अभियंताओं को हाईकोर्ट से राहत मिली है। माननीय हाईकोर्ट ने कलेक्टर दुर्ग द्वारा जारी पत्र के माध्यम से प्रस्तावित कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई एवं अधिक भुगतान की वसूली संबंधी निर्देशों तथा निगम के मुख्य अभियंता द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पर रोक लगा दी है। न्यायालय ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब भी तलब किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023-24 में नगर निगम भिलाई द्वारा निर्धारित टेंडर प्रक्रिया पूरी करने तथा आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति प्राप्त करने के बाद शहर के विभिन्न मार्गों, फुटपाथों और चौक-चौराहों पर पेवर ब्लॉक लगाने के कार्य कराए गए थे। इन कार्यों में निगम निधि के साथ-साथ 15वें वित्त आयोग के अनुदान का भी उपयोग किया गया था। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद संबंधित अधिकारियों द्वारा निरीक्षण एवं सत्यापन के उपरांत ठेकेदारों को भुगतान किया गया था।
इसके बाद पेवर ब्लॉक निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायत सामने आई। शिकायत के आधार पर कलेक्टर दुर्ग द्वारा 3 सितंबर 2026 को जारी पत्र के संदर्भ में लोक निर्माण विभाग और ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, दुर्ग के कार्यपालन अभियंताओं से संयुक्त जांच कराई गई। जांच प्रतिवेदन के अनुसार, कुल 29 अनुबंधों की जांच में 21 अनुबंधों के अंतर्गत विभिन्न स्थानों पर माप पुस्तिका में दर्ज मात्रा की तुलना में मौके पर कम मात्रा पाए जाने का उल्लेख किया गया। जांच में 16 लाख 85 हजार 457 रुपये की अधिक भुगतान राशि दर्ज होने की बात भी सामने आई।
जांच प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर दुर्ग द्वारा संबंधित अभियंताओं एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा कथित अधिक भुगतान की राशि की वसूली के लिए आयुक्त, नगर निगम भिलाई को पत्र जारी किया गया। इसके बाद निगम के मुख्य अभियंता ने उप अभियंता अर्पित बंजारे, चंदन निर्मल, श्वेता महेश्वर, पुरुषोत्तम सिंहा, रीमा हुमने एवं कृष्ण कुमार जंघेल तथा सहायक अभियंता श्वेता वर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किए।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का दिया गया तर्क
उक्त पत्राचार और कारण बताओ नोटिस से प्रभावित होकर अर्पित बंजारे एवं अन्य अभियंताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सिबाशीष मिश्रा के माध्यम से याचिका प्रस्तुत की गई। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति बी.डी. गुरु की अदालत में हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी एवं अधिवक्ता जैनब मुस्तफा वनक ने पैरवी की।
याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि शिकायत के संबंध में कराई गई जांच में उन्हें शामिल होने अथवा अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया गया। ऐसे में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना उनके विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करना उचित नहीं है।
अधिवक्ताओं ने यह भी दलील दी कि संबंधित पत्राचार में पहले ही दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई और वसूली की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए जा चुके थे। इससे यह आशंका उत्पन्न होती है कि याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुने जाने से पहले ही उनके विरुद्ध कार्रवाई को लेकर निष्कर्ष निर्धारित कर लिया गया था। ऐसे में कारण बताओ नोटिस के माध्यम से दिया जाने वाला अवसर केवल पूर्वनिर्धारित निर्णय के विरुद्ध बचाव प्रस्तुत करने तक सीमित रह जाता है।
अधिकारियों से जवाब तलब
याचिकाकर्ताओं की ओर से प्रस्तुत दलीलों पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कलेक्टर दुर्ग के 3 सितंबर 2026 के पत्र में उल्लिखित कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई एवं अधिक राशि की वसूली संबंधी निर्देशों तथा नगर निगम भिलाई के मुख्य अभियंता द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस पर रोक लगा दी। न्यायालय ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव, कलेक्टर दुर्ग, नगर निगम भिलाई के आयुक्त, मुख्य अभियंता और कार्यपालन अभियंता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
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