
कुछ सेकंड का फासला था मौत से… बच्चे की आवाज बनी जिंदगी की पुकार
CBN36 रायपुर। सिर्फ कुछ सेकंड… और एक जिंदगी खत्म हो सकती थी। उरकुरा रेलवे स्टेशन पर 6 सितंबर को दोपहर करीब 12:38 बजे एक छोटे बच्चे की सजगता और स्टेशन मास्टर की असाधारण फुर्ती ने एक महिला की जान बचा ली। तेज रफ्तार मालगाड़ी सामने से आ रही थी और महिला ट्रैक के बेहद करीब खड़ी थी। तभी बच्चे ने स्टेशन मास्टर आनंद उपाध्याय को घबराकर बताया-अंकल, मौसी ट्रेन के सामने जाने वाली हैं।
आवाज सुनते ही उपाध्याय ने न सिग्नल की परवाह की, न अपनी सुरक्षा की। वे तत्काल महिला की ओर दौड़ पड़े। सामने तेज गति से आती मालगाड़ी और ट्रैक के पास खड़ी महिला को देखकर उन्होंने ऐन वक्त पर उसका हाथ पकड़ा और पूरी ताकत से ट्रैक से दूर खींच लिया।
महिला के हटते ही कुछ ही सेकंड बाद मालगाड़ी धड़धड़ाती हुई गुजर गई। जरा सी देर होती तो नतीजा बेहद गंभीर हो सकता था।
बच्चा बना जिंदगी बचाने वाली कड़ी
घटना के वक्त स्टेशन मास्टर आनंद उपाध्याय ट्रेन के लिए सिग्नल के आदान-प्रदान के सिलसिले में प्लेटफॉर्म पर थे। तभी बच्चा दौड़ता हुआ उनके पास पहुंचा। उसने अपनी मौसी के ट्रेन के सामने जाने की आशंका बताई। उपाध्याय ने बच्चे की बात को गंभीरता से लिया और तत्काल मौके की ओर दौड़ पड़े।
उनकी इसी तत्परता ने अनहोनी को टाल दिया। महिला को सुरक्षित हटाने के बाद उन्होंने महिला और दोनों बच्चों को संभाला, पानी पिलाया और रेलवे सुरक्षा बल को सूचना दी।
आरपीएफ ने की काउंसलिंग, मां बेटी को ले गईं घर
सूचना पर आरपीएफ की टीम मौके पर पहुंची और महिला की काउंसलिंग की। कुछ देर बाद महिला की मां भी स्टेशन पहुंच गईं। इसके बाद वे अपनी बेटी को सुरक्षित अपने साथ घर ले गईं।
रेलवे करेगा सम्मानित
उरकुरा स्टेशन की यह घटना इस बात की मिसाल बनी कि संकट की घड़ी में एक बच्चे की सजगता और एक रेलकर्मी की त्वरित कार्रवाई कितनी बड़ी भूमिका निभा सकती है। बच्चे ने खतरे को पहचाना और स्टेशन मास्टर ने बिना समय गंवाए कार्रवाई कर एक जिंदगी बचा ली।
स्टेशन मास्टर आनंद उपाध्याय के साहस, तत्परता और मानवीय संवेदनशीलता की रेल प्रशासन ने सराहना की है। उनके इस साहसिक कार्य के लिए उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है।
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