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September 14, 2026 5:12 pm

अंग्रेजी के मोह से बाहर निकल हिंदी को तकनीक की भाषा बनाएं : प्रो. दीक्षित

हिंदी की संवैधानिक स्थिति और तकनीकी चुनौतियों पर हुआ विशेष व्याख्यान

CBN36 वर्धा, 14 सितंबर। हिंदी दिवस के अवसर पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में सोमवार को ‘हिंदी की संवैधानिक स्थिति एवं वर्तमान तकनीकी चुनौतियां’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। महादेवी वर्मा सभागार में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की। लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अवकाश प्राप्त अध्यक्ष प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने ऑनलाइन व्याख्यान में कहा कि हिंदी को आगे बढ़ाने के लिए केवल नीतियां पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि आंतरिक निष्ठा और दृढ़ संकल्प जरूरी है।

प्रो. दीक्षित ने कहा कि हिंदी आज सृजन, व्यापार, तकनीकी और राजकाज की भाषा बन चुकी है। 14 सितंबर 1950 को नियमावली बनने के बाद हिंदी को 15 वर्षों में सर्वांग-संपन्न बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके लिए आयोग और कार्यालय भी बनाए गए, लेकिन अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि बदलते तकनीकी दौर में हिंदी को समय के अनुरूप सक्षम बनाने के लिए संबंधित अधिनियम की धाराओं में भी आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए।

उन्होंने यूनिकोड को हिंदी के तकनीकी विकास में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इसके कारण हिंदी के डिजिटल विस्तार को बड़ी मदद मिली है। प्रो. दीक्षित ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति की संवाहक है। किसी भाषा का नष्ट होना उसके साथ जुड़ी संस्कृति के नष्ट होने का कारण बन सकता है। उन्होंने भाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए स्वतंत्र भाषा मंत्रालय बनाए जाने की जरूरत भी बताई। साथ ही हिंदी के सामने मौजूद तकनीकी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की।

हिंदी को सक्षम बनाने के लिए आत्मविश्वास जरूरी : कुलपति

कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि अंग्रेजी के मोह से बाहर निकलकर अपने भीतर आत्मविश्वास और स्वाभिमान पैदा करना होगा। वर्तमान तकनीकी दौर में हिंदी को अधिक सक्षम बनाने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि भाषा में सरलता उसकी गति बढ़ाती है। दैनिक जीवन में प्रचलित सहज शब्दों का अधिकाधिक प्रयोग किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हिंदी की प्रगति केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि समाज की आंतरिक निष्ठा और दृढ़ संकल्प से संभव है। सरकारी कार्यालयों में मौलिक कार्य हिंदी में किए जाने को बढ़ावा देने की भी उन्होंने अपील की।

वैश्विक पटल पर हिंदी पहुंचाने की प्रतिबद्धता

हिंदी साहित्य विभाग की अध्यक्ष प्रो. प्रीति सागर ने स्वागत भाषण में कहा कि विश्वविद्यालय हिंदी के वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है। हिंदी को वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित करने के लिए जिम्मेदारी के साथ काम करने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम का संचालन सहायक प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने किया तथा एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अशोक नाथ त्रिपाठी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और कुलगीत गायन से हुई। इस अवसर पर प्रो. जनार्दन कुमार तिवारी, डॉ. एच. ए. हुनगुंद, डॉ. रामानुज अस्थाना, डॉ. रूपेश कुमार सिंह, डॉ. शैलेष मरजी कदम, डॉ. कोमल कुमार परदेसी, डॉ. रवि कुमार, डॉ. अमित विश्वास, बी.एस. मिरगे सहित बड़ी संख्या में शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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