
जल उपयोगिता समिति की बैठक में जलभराव और फसलों की स्थिति की समीक्षा, दलहन-तिलहन को बढ़ावा देने पर जोर
CBN36 बिलासपुर। पर्याप्त बारिश से इस साल संभाग में खेती-किसानी के काम सुचारू रूप से चल रहे हैं। जलाशयों में भी निस्तार और सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध है। किसानों की ओर से अब तक कृषि कार्य के लिए जलाशयों से पानी छोड़ने की मांग नहीं की गई है। गुरुवार को संभागायुक्त कार्यालय कोनी के सभाकक्ष में संभाग स्तरीय जल उपयोगिता समिति की बैठक में यह जानकारी सामने आई।
बैठक की अध्यक्षता संभागायुक्त सुनील जैन ने की। उन्होंने सिंचाई जलाशयों में जलभराव, फसलों की मौजूदा स्थिति के साथ रबी सिंचाई वर्ष 2025-26 की उपलब्धि और खरीफ सिंचाई वर्ष 2026-27 के लक्ष्य की समीक्षा की। बैठक में डिप्टी कमिश्नर डॉ. स्मृति तिवारी, हरिशंकर चौहान सहित संभाग स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।
बड़े जलाशयों में बेहतर स्थिति
अधिकारियों ने बताया कि संभाग के सभी बड़े, मध्यम और लघु जलाशयों में निस्तार एवं सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध है। मिनीमाता हसदेव बांगो परियोजना में 95 प्रतिशत, खारंग और मनियारी जलाशय में 104-104 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है। वहीं निर्माणाधीन अरपा-भैंसाझार बैराज में 26 प्रतिशत और केलो परियोजना में 44.58 प्रतिशत जलभराव है।
मध्यम परियोजनाओं में घोंघा जलाशय में 102 प्रतिशत, केदार में 101 प्रतिशत, पुटका में 100 प्रतिशत, किंकारी में 101 प्रतिशत तथा खम्हार पाकुर जलाशय में 101 प्रतिशत जलभराव बताया गया।
7.51 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षमता
संभाग के आठ जिलों में पांच वृहद, छह मध्यम, 768 लघु सिंचाई योजनाओं और 10 नलकूप योजनाओं के माध्यम से कुल 7,51,043 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता सृजित है। बैठक में सिंचाई योजनाओं की उपलब्धियों और आगामी खरीफ सीजन के लक्ष्यों की भी विस्तार से समीक्षा की गई।
खाद-बीज की उपलब्धता की भी समीक्षा
संभागायुक्त ने खाद और बीज की उपलब्धता एवं वितरण की स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। श्री जैन ने कहा कि योजना बनाते समय प्रत्येक गांव की स्थानीय जरूरतों को ध्यान में रखा जाए। इसके साथ ही किसानों को दलहन-तिलहन फसलों के फायदे और खेती की तकनीक के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाने के निर्देश भी दिए।
प्रधान संपादक




