CBN36 नई दिल्ली। भारतीय रेलवे की यात्री आरक्षण प्रणाली (पीआरएस) ने चार दशक का सफर तय करते हुए मैन्युअल काउंटरों की लंबी कतारों से लेकर आधुनिक डिजिटल बुकिंग तक का सफर पूरा कर लिया है। वर्ष 1986 में शुरू हुई यह व्यवस्था आज दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक ऑनलाइन आरक्षण प्रणालियों में शामिल है। रेलवे अब अगली पीढ़ी की क्लाउड-आधारित पीआरएस प्रणाली लागू कर रहा है, जिससे टिकट बुकिंग पहले से कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होगी।
रेलवे के अनुसार, नई पीआरएस प्रणाली में प्रति मिनट 32 हजार के मुकाबले 1.5 लाख से अधिक टिकट बुक किए जा सकेंगे। वहीं, पूछताछ की क्षमता भी 4 लाख से बढ़कर 40 लाख प्रति मिनट से अधिक हो जाएगी। इसमें बहुभाषी इंटरफेस, बेहतर उपयोगकर्ता अनुभव और भविष्य की बढ़ती मांग के अनुरूप मजबूत तकनीकी ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा।
ऑनलाइन टिकट बुकिंग का बढ़ा दायरा
जून 2025 से जून 2026 के बीच पीआरएस के जरिए 65.08 करोड़ आरक्षित टिकट बुक किए गए, जिनमें 57.90 करोड़ यानी 89 प्रतिशत टिकट ऑनलाइन बुक हुए। वर्तमान में पीआरएस प्रतिदिन 20.5 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा दे रहा है और लगभग 73 प्रतिशत लेनदेन कैशलेस हो चुके हैं।
बदलती जरूरतों के अनुरूप सुधार
रेलवे ने आरक्षण प्रणाली को अधिक पारदर्शी और यात्री-केंद्रित बनाने के लिए कई बदलाव किए हैं। अग्रिम आरक्षण अवधि (एआरपी) को 120 दिन से घटाकर 60 दिन किया गया है। जुलाई 2025 से आधार-प्रमाणित तत्काल बुकिंग लागू की गई, जबकि बाद में ओटीपी आधारित सत्यापन जोड़कर फर्जी बुकिंग और बॉट्स पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई।
नई आईआरसीटीसी वेबसाइट भी होगी अधिक आसान
रेलवे ने जुलाई 2026 में आईआरसीटीसी की नई वेबसाइट का बीटा संस्करण भी शुरू किया है। इसमें सरल इंटरफेस, कम चरणों में टिकट बुकिंग और सभी श्रेणियों में सीट उपलब्धता देखने जैसी सुविधाएं दी गई हैं। इसे जल्द ही नई पीआरएस प्रणाली से जोड़ा जाएगा।
1986 से 2026 तक का सफर
1986 में कम्प्यूटरीकृत यात्री आरक्षण प्रणाली की शुरुआत हुई। 1990 के दशक में इसे पूरे देश के रेलवे नेटवर्क से जोड़ा गया। वर्ष 2002 में इंटरनेट टिकट बुकिंग शुरू हुई, जबकि 2014 में अगली पीढ़ी की ई-टिकटिंग प्रणाली लागू की गई। 2025 में रेलवन ऐप लॉन्च हुआ और अगस्त 2026 से नई पीआरएस प्रणाली में ट्रेनों का चरणबद्ध स्थानांतरण शुरू हो गया।
सीआरआईएस ने बदली रेलवे की डिजिटल तस्वीर
रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (सीआरआईएस) ने पीआरएस के अलावा यूटीएस, एनटीईएस, रेलकनेक्ट, रेलवन और रेलमदद जैसे कई डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किए हैं। रेलवन ऐप अब तक 4.55 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है और प्रतिदिन करीब 9.65 लाख टिकटों की बुकिंग कर रहा है। इसमें एआई आधारित वेटिंग टिकट कन्फर्मेशन प्रेडिक्शन जैसी सुविधा भी उपलब्ध है।
आधुनिक तकनीक से और स्मार्ट होगी रेलवे
रेलवे अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, बिग डेटा और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहा है। इनकी मदद से ट्रेन संचालन, टिकट कन्फर्मेशन, ऊर्जा प्रबंधन और परिसंपत्तियों के रखरखाव को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है।
भारतीय रेलवे का कहना है कि अगली पीढ़ी की पीआरएस प्रणाली यात्रियों को तेज, विश्वसनीय और बाधारहित आरक्षण सुविधा उपलब्ध कराएगी तथा भविष्य की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप देश के सबसे बड़े डिजिटल आरक्षण नेटवर्क को और मजबूत बनाएगी।
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