CBN 36 बिलासपुर। बस्तर संभाग के विभिन्न इलाकों में सामुदायिक तनाव के दौरान घर छोड़ने और संपत्ति नुकसान का सामना करने वाले ग्रामीणों की याचिकाओं पर छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। जस्टिस एके प्रसाद ने अपने फैसले में कहा कि वर्तमान में तनाव की स्थिति समाप्त हो चुकी है और प्रभावित ग्रामीणों की सुरक्षा एवं पुनर्वास संबंधी परिस्थितियां सामान्य हो गई हैं। कोर्ट ने प्रभावित याचिकाकर्ताओं को संपत्ति के नुकसान के मुआवजे के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन देने की छूट दी है। याचिकाकर्ताओं के आवेदन पर कानून के अनुसार निर्णय लेने का निर्देश अधिकारियों को दिया है।
नारायणपुर और कोंडागांव जिले के किशोर पाट्रो, राम पोयाम सहित अन्य ग्रामीणों ने अलग-अलग याचिकाएं दायर की थी। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि सामुदायिक हिंसा के दौरान उन्हें परेशान किया गया, उनके साथ मारपीट हुई और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने घटना की जांच के लिए विशेष जांच दल गठित करने, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, परिवारों को सुरक्षा देने, गांव में सम्मानपूर्वक पुनर्वास कराने और धर्म के पालन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग की थी। इसके साथ ही पूरी संपत्ति नष्ट होने और घटना के कारण हुई मानसिक पीड़ा के लिए उचित मुआवजा देने की मांग भी की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने कथित लापरवाही के लिए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जांच की मांग भी की थी।
राज्य सरकार ने हाई कोर्ट को बताया, बस्तर संभाग के कुछ हिस्सों में स्थानीय लोगों के बीच तनाव की स्थिति बनी थी, लेकिन प्रशासन और पुलिस के समय पर हस्तक्षेप से स्थिति नियंत्रित कर ली गई। कुछ ग्रामीणों ने तनाव के कारण अपने घर छोड़ दिए थे। प्रशासन ने उनके लिए शिविर लगाकर तत्काल रहने की व्यवस्था की थी। स्थिति सामान्य होने के बाद ग्रामीण अपने घर लौट गए और शिविर बंद कर दिए गए। राज्य सरकार ने बताया, अब तनाव की स्थिति नहीं है, शांति और सामान्य स्थिति बहाल हो चुकी है। किसी ग्रामीण या याचिकाकर्ता की सुरक्षा को लेकर भी वर्तमान में कोई खतरा नहीं है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि सुरक्षा और स्थिति सामान्य होने के बावजूद संपत्ति नुकसान के मुआवजे का मुद्दा अभी तय नहीं हुआ है। इस पर हाई कोर्ट ने कहा कि याचिकाएं जिन परिस्थितियों को लेकर दायर की गई थी, उनमें से मुख्य परिस्थितियां अब समाप्त हो चुकी है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को छूट देते हुए कहा, संपत्ति नुकसान के मुआवजे के लिए संबंधित अधिकारियों के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
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