नई दिल्ली।भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) लागू हो गया है। सरकार ने गुरुवार को कहा कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, सेवाओं और पेशेवरों की आवाजाही को बढ़ावा मिलेगा तथा भारत के लगभग 99 प्रतिशत निर्यात को यूके के बाजार में शुल्क-मुक्त पहुंच प्राप्त होगी।
सरकार के अनुसार, समझौते से वस्त्र, चमड़ा, फुटवियर, रत्न एवं आभूषण, कृषि, समुद्री उत्पाद, खाद्य प्रसंस्करण, इंजीनियरिंग, रसायन और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और रोजगार सृजन को भी बल मिलेगा।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025-26 में भारत और यूके के बीच वस्तु व्यापार 25.12 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इस दौरान भारत ने 13.44 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात और 11.68 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात किया, जिससे 1.76 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार अधिशेष दर्ज किया गया। वर्ष 2024 में दोनों देशों के बीच सेवा व्यापार 35.44 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
सरकार ने कहा कि समझौते के तहत भारतीय एमएसएमई को सरल सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, कागज-रहित व्यापार और डिजिटल प्रणाली का लाभ मिलेगा। वहीं भारतीय पेशेवरों को यूके में सेवाएं देने और काम करने के अधिक अवसर उपलब्ध होंगे। डबल कॉन्ट्रिब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी) के तहत 60 माह तक यूके में कार्यरत भारतीय पेशेवरों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा अंशदान से राहत मिलेगी।

सरकार ने स्पष्ट किया कि समझौते में घरेलू उद्योगों और कृषि जैसे संवेदनशील क्षेत्रों के हितों का भी संरक्षण किया गया है। डेयरी, दालें, खाद्य तेल, अनाज सहित कई उत्पादों को शुल्क रियायतों से बाहर रखा गया है, जबकि कुछ क्षेत्रों में चरणबद्ध शुल्क कटौती का प्रावधान किया गया है।
सरकार का कहना है कि सीईटीए से व्यापार और निवेश में वृद्धि के साथ भारत-यूके आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती मिलेगी तथा दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
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