
कलेक्टर आईएएस संजय अग्रवाल ने कहा यह केवल परियोजना नहीं, जनभागीदारी का अभियान है


एसएसपी आईपीएस रजनेश सिंह ने कहा तकनीक आधारित पुलिसिंग का नया अध्याय
छत्तीसगढ़ ।बिलासपुर शहर जल्द ही एक ऐसे सुरक्षा तंत्र से जुड़ने जा रहा है, जो केवल पुलिस या प्रशासन का नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा प्रयास होगा। अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और शहरी निगरानी को नई मजबूती देने के उद्देश्य से शुरू की जा रही ‘त्रिनेत्र’ योजना शहर की सुरक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव लाने की तैयारी में है।
करीब 10 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस योजना के तहत शहर के प्रमुख मार्गों, चौक-चौराहों, संवेदनशील क्षेत्रों तथा प्रवेश-निकास बिंदुओं पर 1000 अत्याधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। विशेष बात यह है कि यह परियोजना सरकारी बजट से नहीं, बल्कि जनसहयोग और कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व सीएसआर के माध्यम से साकार की जा रही है। प्रशासन, पुलिस, उद्योग जगत, व्यापारिक संगठनों और आम नागरिकों की साझेदारी इस योजना को विशेष बनाती है।
क्यों जरूरी है त्रिनेत्र?

वर्तमान समय में अपराध की प्रकृति तेजी से बदल रही है। चोरी, लूट, सड़क दुर्घटनाएं, महिलाओं के खिलाफ अपराध, साइबर अपराध और यातायात नियमों के उल्लंघन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक आधारित निगरानी व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की जा रही है। ऐसे में त्रिनेत्र योजना केवल अपराध होने के बाद जांच का माध्यम नहीं होगी, बल्कि अपराध की रोकथाम और त्वरित कार्रवाई का भी प्रभावी साधन बनेगी।
कैमरों की आंख से चौबीसों घंटे निगरानी
योजना के तहत लगाए जाने वाले कैमरे सामान्य सीसीटीवी कैमरों से कहीं अधिक उन्नत होंगे। इनमें ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन एएनपीआर कैमरे, हाई-रिजोल्यूशन बुलेट कैमरे, पीटीजेड कैमरे तथा लंबी दूरी तक निगरानी करने वाले विशेष फोकस कैमरे शामिल होंगे।

इन कैमरों की सहायता से जहाँ संदिग्ध वाहनों की पहचान अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी वहीं ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन की निगरानी और आपात परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया संभव हो सकेगी। बिलासपुर शहर के प्रमुख चौक-चौराहों से लेकर संवेदनशील क्षेत्रों तक निगरानी का व्यापक नेटवर्क तैयार किया जाएगा।
सुरक्षा का डिजिटल मस्तिष्क बनेगा कंट्रोल सेंटर
तारबहार स्थित एकीकृत कंट्रोल एंड कमांड सेंटर आईसीसीसी को इस परियोजना का संचालन केंद्र बनाया जा रहा है। यहां अत्याधुनिक वीडियो वॉल डिस्प्ले और नवीन सर्वर प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिसके माध्यम से हजारों कैमरों की निगरानी एक साथ की जा सकेगी।यह कंट्रोल सेंटर पुलिस और प्रशासन को रियल टाइम सूचना उपलब्ध कराएगा तथा शहर की सुरक्षा व्यवस्था के केंद्रीय तंत्र के रूप में कार्य करेगा।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को मिलेगी मजबूती
सार्वजनिक स्थलों, बाजारों, शैक्षणिक संस्थानों और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ने से महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को नया भरोसा मिलेगा। किसी भी घटना की स्थिति में कैमरों से प्राप्त साक्ष्य जांच प्रक्रिया को मजबूत करेंगे और अपराधियों तक पहुंचने में सहायता करेंगे।विशेषज्ञों का मानना है कि कैमरों की मौजूदगी अपराधियों में मनोवैज्ञानिक भय उत्पन्न करती है, जिससे अपराध की संभावना भी कम होती है।
यातायात व्यवस्था में आएगा सुधार
बढ़ते शहरी विस्तार और वाहनों की संख्या के बीच यातायात प्रबंधन बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। त्रिनेत्र योजना के माध्यम से ट्रैफिक जाम, नियम उल्लंघन और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की प्रभावी निगरानी की जा सकेगी। इससे यातायात पुलिस को त्वरित निर्णय लेने और व्यवस्था सुधारने में मदद मिलेगी।
कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा यह केवल परियोजना नहीं, जनभागीदारी का अभियान है
कलेक्टर आईएएस संजय अग्रवाल का कहना है कि त्रिनेत्र योजना प्रशासन, पुलिस, व्यापारिक संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों की साझेदारी से संचालित एक जनहितैषी पहल है। उनके अनुसार आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग से शहर की निगरानी व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी और अपराध नियंत्रण, यातायात प्रबंधन तथा महिला सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
वे मानते हैं कि सुरक्षित वातावरण किसी भी शहर के समग्र विकास की आधारशिला है। जनसहयोग से संचालित यह योजना समाज और प्रशासन के बीच विश्वास तथा सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनेगी।
एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा तकनीक आधारित पुलिसिंग का नया अध्याय
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पुलिस उप महानिरीक्षक आईपीएस रजनेश सिंह का कहना है कि यह परियोजना पुलिसिंग को अधिक प्रभावी, आधुनिक और परिणामोन्मुख बनाएगी। कैमरों की सहायता से संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल नजर रखी जा सकेगी, अपराधों की जांच में तेजी आएगी और यातायात नियमों के उल्लंघन पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।
उनके अनुसार डिजिटल निगरानी व्यवस्था चोरी, लूट, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य आपराधिक घटनाओं की रोकथाम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा जांच एजेंसियों को सशक्त साक्ष्य उपलब्ध कराएगी।
जनता की भागीदारी बनेगी सबसे बड़ी ताकत
पूर्व एल्डरमैन मनीष अग्रवाल ने बताया त्रिनेत्र सेवा समिति के माध्यम से संचालित इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी जनभागीदारी है। उद्योगपति, व्यापारी, सामाजिक संस्थाएं और नागरिक सीएसआर अथवा स्वैच्छिक योगदान के माध्यम से इस अभियान का हिस्सा बन सकते हैं।
योजना से जुड़े कोषाध्यक्ष प्रवीण झा ने कहा कि कि शहर की सुरक्षा केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक की साझी जिम्मेदारी है। जब नागरिक स्वयं सुरक्षा अभियान का हिस्सा बनते हैं तो उसके परिणाम अधिक प्रभावी और दीर्घकालिक होते हैं।
बिलासपुर के लिए नई पहचान की उम्मीद
राम अवतार अग्रवाल ने कहा त्रिनेत्र योजना केवल सीसीटीवी कैमरे लगाने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह एक ऐसे सुरक्षित और आधुनिक शहर की परिकल्पना है जहां तकनीक, प्रशासन और समाज मिलकर बेहतर भविष्य का निर्माण करें। यदि योजना निर्धारित स्वरूप में सफलतापूर्वक लागू होती है तो बिलासपुर अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा, स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन और तकनीक आधारित शहरी प्रशासन के क्षेत्र में प्रदेश ही नहीं, देश के लिए भी एक मॉडल बन सकता है।सुरक्षित, सजग और स्मार्ट बिलासपुर का यह सपना अब केवल एक अवधारणा नहीं, बल्कि जनसहयोग और तकनीक के दम पर साकार होने की दिशा में बढ़ता हुआ एक मजबूत कदम है।
प्रधान संपादक


