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April 25, 2026 12:29 am

प्रदेशभर में लागू होगी नई व्यवस्था, डिजिटल-डीएनए साक्ष्यों से बढ़ेगी सजा दर ,अब बचना मुश्किल: छत्तीसगढ़ में हाई-टेक पुलिसिंग का विस्तार

“आईजी रेंज रामगोपाल गर्ग के निर्देश पर कार्यशाला का आयोजन ,एफएसएल रायपुर के संचालक सुशील द्विवेदी के सहयोग तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आईपीएस भोजराम पटेल की मौजूदगी में दिया गया प्रशिक्षण”

डिजिटल-डीएनए साक्ष्यों से बढ़ेगी सजा दर, मुंगेली से शुरू पहल पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी

रायपुर।छत्तीसगढ़ में अपराध जांच अब पूरी तरह तकनीक आधारित होने जा रही है।जांच प्रणाली को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव शुरू हो गया है। पुलिस अब पुराने पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक और डीएनए साक्ष्यों पर आधारित हाई-टेक जांच को प्राथमिकता दे रही है। इसकी शुरुआत मुंगेली जिले से हुई है, जिसे चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में लागू करने की तैयारी है।

पुलिस लाइन मुंगेली में “Digital, Electronic & DNA Evidence in Pursuit of Justice” विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में अधिकारियों को आधुनिक साक्ष्य संकलन, संरक्षण और न्यायालय में प्रभावी प्रस्तुतिकरण का प्रशिक्षण दिया गया। यह पहल बिलासपुर रेंज पुलिस मुख्यालय और एफएसएल के संयुक्त समन्वय से आयोजित की गई।

यह कार्यशाला का आयोजन बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक आईपीएस रामगोपाल गर्ग के दिशा-निर्देश एवं एफएसएल रायपुर के संचालक सुशील द्विवेदी के सहयोग तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आईपीएस भोजराम पटेल के मार्गदर्शन में हुआ।

तकनीकी साक्ष्य बन रहे जांच की रीढ़

कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि बदलते समय में अपराधों की प्रकृति तेजी से डिजिटल होती जा रही है। ऐसे में मोबाइल फोन, लैपटॉप, सीसीटीवी फुटेज, सोशल मीडिया डेटा और डीएनए सैंपल जैसे साक्ष्य जांच की रीढ़ बन चुके हैं। इनका वैज्ञानिक उपयोग न केवल आरोपियों तक तेजी से पहुंचने में मदद करता है, बल्कि अदालत में मामलों को मजबूत भी बनाता है।

एफएसएल रायपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. विक्रांत सिंह, एफएसएल बिलासपुर की वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. स्वाति कुजुर एवं डॉ. ज्योत्सना लकड़ा ने साक्ष्य के वैज्ञानिक संकलन, सुरक्षित सीलिंग, चेन ऑफ कस्टडी और डिजिटल डेटा विश्लेषण की बारीकियों पर विस्तार से जानकारी दी।

कन्विक्शन रेट बढ़ाने पर फोकस

एसएसपी भोजराम पटेल ने कहा कि अब जांच का उद्देश्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि ठोस और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर अदालत में दोष सिद्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने थाना क्षेत्रों में आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करें, ताकि मजबूत केस तैयार हो सकें।

साइबर अपराधों से निपटने की तैयारी

कार्यशाला में साइबर और तकनीकी अपराधों की बढ़ती चुनौती पर भी विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों को ई-साक्ष्य ऐप के उपयोग, डिजिटल डेटा ट्रैकिंग और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की वैधता पर व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया, जिससे ऑनलाइन अपराधों की जांच और अधिक प्रभावी हो सके।

प्रदेशभर में लागू होगी नई व्यवस्था

सूत्रों के अनुसार, इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को जल्द ही राज्य के अन्य जिलों में भी आयोजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य पूरे छत्तीसगढ़ में एक समान, आधुनिक और वैज्ञानिक जांच प्रणाली विकसित करना है।

एसएसपी भोजराम पटेल का कहना है नई व्यवस्था लागू होने के बाद जांच में डिजिटल और डीएनए साक्ष्यों का दायरा बढ़ेगा। इससे मामलों की मजबूती के साथ कोर्ट में दोष सिद्ध होने की दर बढ़ने की उम्मीद है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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