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April 19, 2026 4:41 pm

कोपरा जलाशय EIA रिपोर्ट पर सवाल, प्रवासी पक्षियों की अनदेखी से बढ़ा विवाद


EIA रिपोर्ट में दावों पर आपत्ति, 161 पक्षी प्रजातियों के आवास और सेंट्रल एशियन फ्लाईवे की अनदेखी का आरोप

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ की पहली रामसर साइट कोपरा जलाशय एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। प्रस्तावित स्टील एवं पावर प्लांट परियोजना के लिए तैयार इनवायरमेंट इंपैक्ट एसेसमेंट (EIA) रिपोर्ट में कथित रूप से भ्रामक जानकारी दिए जाने का मामला सामने आया है। इस संबंध में अधिवक्ता संदीप तिवारी एवं वाइल्डलाइफ फोटोजर्नलिस्ट सत्यप्रकाश पांडेय ने आपत्ति दर्ज कराई है। वहीं वेटलैंड अथॉरिटी ने बिलासपुर कलेक्टर को पत्र भेजकर शिकायतों की जांच के निर्देश दिए हैं।

श्री तिवारी ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि EIA रिपोर्ट में दावा किया गया है कि परियोजना स्थल के 10 किलोमीटर दायरे में किसी भी वन्यजीव का प्रवासी मार्ग नहीं है, जबकि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 के तहत पक्षियों को भी वन्यजीव की श्रेणी में शामिल किया गया है।

रामसर कन्वेंशन को दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार कोपरा जलाशय 161 प्रजातियों के पक्षियों का महत्वपूर्ण आवास है, जिनमें 58 प्रवासी प्रजातियां शामिल हैं। ये प्रजातियां हर वर्ष सेंट्रल एशियन फ्लाईवे के माध्यम से यहां पहुंचती हैं। उल्लेखनीय है कि इनमें पांच अत्यंत संकटग्रस्त प्रजातियां भी शामिल हैं।

सेंट्रल एशियन फ्लाईवे एक अंतरराष्ट्रीय प्रवासी मार्ग है, जिसके जरिए पक्षी ठंड के मौसम में साइबेरिया एवं मध्य एशिया से भारत जैसे देशों की ओर आते हैं। यह मार्ग भोजन, विश्राम और संरक्षण के लिए आर्द्रभूमियों पर निर्भर करता है, ऐसे में इन स्थलों को नुकसान पहुंचना पूरे पारिस्थितिक तंत्र पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है।

श्री तिवारी का आरोप है कि EIA रिपोर्ट में इस महत्वपूर्ण प्रवासी मार्ग की भूमिका को नजरअंदाज किया गया है। उन्होंने मांग की है कि अपूर्ण और भ्रामक जानकारी के आधार पर तैयार रिपोर्ट को निरस्त कर स्वतंत्र एवं वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाए, ताकि परियोजना के समग्र पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन हो सके।

वेटलैंड अथॉरिटी द्वारा मामले को जिला प्रशासन को भेजे जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। उनका कहना है कि रामसर से जुड़े तकनीकी पहलुओं की जांच संबंधित विशेषज्ञ संस्थान द्वारा ही की जानी चाहिए।

यह प्रकरण एक बार फिर विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन की बहस को तेज करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि संवेदनशील आर्द्रभूमियों में किसी भी औद्योगिक परियोजना को स्वीकृति देने से पहले गहन और पारदर्शी अध्ययन आवश्यक है, क्योंकि ऐसे क्षेत्रों पर प्रभाव का दायरा स्थानीय सीमाओं से परे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकता है।

कोपरा जलाशय से जुड़ा यह मामला केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि नीति, प्राथमिकताओं और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का प्रश्न बनकर उभरा है। विशेषज्ञों ने पारदर्शिता और वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लेने की आवश्यकता पर बल दिया है, ताकि विकास और जैव विविधता संरक्षण के बीच संतुलन कायम रखा जा सके।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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