
“सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर के जिन क्षेत्रों तक कभी विकास नहीं पहुंचा था, वहां आज योजनाओं के माध्यम से नई उम्मीद जगी,अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना ही सरकार की प्राथमिकता”

रायपुर।लंबे समय तक नक्सल प्रभाव के कारण विकास से दूर रहे बीजापुर जिला के अंदरूनी इलाकों में अब बदलाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। नियद नेल्लानार योजना और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के प्रभावी क्रियान्वयन से इन क्षेत्रों में रोजगार, आवास, पेयजल और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है।
जिले में 42 सुरक्षा कैम्पों के माध्यम से 67 ग्राम पंचायतों के 224 गांवों को योजना से जोड़ा गया है। मनरेगा के सहयोग से स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन और आधारभूत ढांचे के निर्माण को गति मिली है, जिससे ग्रामीणों को अपने ही गांव में काम मिलने लगा है।
16 हजार से अधिक परिवारों को रोजगार
इन क्षेत्रों में अब तक 16,671 जॉब कार्ड पंजीकृत किए गए हैं, जिनमें 7,271 नए कार्ड शामिल हैं। विशेष रूप से नक्सल प्रभावित परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया गया है। 966 आत्मसमर्पित नक्सली, 178 घायल पीड़ित परिवार और 477 मृतक नक्सल पीड़ित परिवारों को रोजगार से जोड़ा गया है।
5 लाख मानव दिवस सृजित, 1,744 कार्य पूर्ण
मनरेगा के तहत 1,744 विकास कार्यों के माध्यम से 5 लाख से अधिक मानव दिवस सृजित किए गए हैं। इससे न केवल रोजगार बढ़ा है, बल्कि पलायन में कमी और शासन के प्रति विश्वास में वृद्धि हुई है।
आजीविका डबरी से बढ़ी आय
नियद नेल्लानार क्षेत्र में 372 आजीविका डबरी स्वीकृत की गई हैं। भैरमगढ़ जनपद के बेलनार गांव में, जहां कभी नक्सल प्रभाव के कारण लोग पलायन कर गए थे, अब ग्रामीण वापस लौट रहे हैं और मछली पालन व सब्जी उत्पादन से आय अर्जित कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री आवास से मिला सुरक्षित आशियाना

प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के अंतर्गत 2,977 परिवारों को आवास स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से 690 मकान पूर्ण हो चुके हैं। इससे परिवारों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन मिला है।
गांव-गांव में दिख रहा बदलाव
दुगाली गांव में मनरेगा से निर्मित कुआं 100 से अधिक ग्रामीणों के लिए पेयजल का स्थायी स्रोत बना है। पालनार में पंचायत भवन, आंगनबाड़ी और गौठान निर्माण कार्य जारी हैं, जहां 200 से अधिक श्रमिक कार्यरत हैं। कावड़गांव में अब सभी ग्रामीणों को जॉब कार्ड मिल चुके हैं और सड़क, बिजली, पानी, स्कूल व मोबाइल टॉवर जैसी सुविधाएं पहुंच चुकी हैं।
सावनार और पुसुकोण्टा में नए आंगनबाड़ी भवनों से बच्चों को बेहतर शिक्षा और पोषण मिल रहा है, वहीं धरमारम और तोड़का में उचित मूल्य दुकानों के निर्माण से ग्रामीणों को गांव में ही राशन उपलब्ध हो रहा है। बांगोली गांव के 524 परिवारों को अब 18 किलोमीटर दूर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही।
युवाओं को मिल रहा कौशल और रोजगार

स्थानीय युवाओं और आत्मसमर्पित नक्सलियों को राजमिस्त्री प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है, जिससे वे निर्माण कार्यों में रोजगार प्राप्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर के जिन क्षेत्रों तक कभी विकास नहीं पहुंचा था, वहां आज योजनाओं के माध्यम से नई उम्मीद जगी है। उन्होंने कहा कि अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना ही सरकार की प्राथमिकता है और यही स्थायी शांति एवं समृद्धि का आधार बनेगा।सरकार के अनुसार, समन्वित प्रयासों, जनभागीदारी और संवेदनशील नीतियों के चलते नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव संभव हुआ है और इस विकास को आगे भी गति दी जाएगी।
प्रधान संपादक


