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April 10, 2026 12:44 am

महिलाओं के दम पर बदल रही विकास की धारा, योजनाओं से लेकर नेतृत्व तक बढ़ी भागीदारी

(श्रीमती विजया रहाटकर,लेखिका राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष हैं)

नई दिल्ली। देश में विकास की दिशा अब एक नए सामाजिक परिवर्तन की ओर इशारा कर रही है, जहां महिलाएं केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि परिवर्तन की अगुवाई करती नजर आ रही हैं। पिछले कुछ वर्षों में केंद्र और राज्य स्तर पर संचालित योजनाओं के प्रभाव से महिलाओं की भागीदारी सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक—तीनों स्तरों पर तेजी से बढ़ी है।

ग्रामीण भारत में यह बदलाव सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाएं न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती दे रही हैं। बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच बढ़ने और आसान ऋण उपलब्ध होने से लाखों महिलाएं छोटे व्यवसाय और कृषि आधारित गतिविधियों से जुड़ रही हैं।

स्थानीय शासन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने निर्णय प्रक्रिया को भी प्रभावित किया है। पंचायतों और नगरीय निकायों में बड़ी संख्या में महिला प्रतिनिधि सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ी है।

सामाजिक स्तर पर भी बदलाव दर्ज किया गया है। बालिका शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी योजनाओं ने परिवारों की सोच में परिवर्तन लाया है। अब बेटियों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर पहले की तुलना में अधिक ध्यान दिया जा रहा है, जिसका असर सामाजिक सूचकांकों में सुधार के रूप में देखा जा रहा है।

रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी महिलाएं तेजी से आगे बढ़ रही हैं। सरकारी योजनाओं के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इससे महिलाएं पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की यह बढ़ती भागीदारी देश के समावेशी विकास की मजबूत नींव तैयार कर रही है। यदि यह गति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत की विकास गाथा में महिलाओं की भूमिका और अधिक निर्णायक हो सकती है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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