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March 25, 2026 10:31 pm

कोल वाशरी स्थापना से पर्यावरण व स्वास्थ्य पर खतरे की आशंका, मामला विधानसभा में उठा

रायपुर/कोटा, 25 मार्च 2026।कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने ग्राम अमाली में प्रस्तावित कोल वाशरी की स्थापना को लेकर विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से गंभीर चिंताएं जताई हैं। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से क्षेत्र के पर्यावरण, कृषि, जल स्रोतों तथा ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

विधायक श्री श्रीवास्तव ने सदन में बताया कि ग्राम अमाली में मेसर्स विराज अर्थफ्यूजन प्रा. लि. द्वारा कोल वाशरी स्थापित की जा रही है। इसके निर्माण एवं संचालन से अमाली, बिल्लीबंद, नवागांव, सिल्दहा, कुवांरीमुड़ा, सल्का, पोड़ी, चंगोरी, गोबरीपाठ, अमने, पीपरतराई, कलारतराई, छेरकाबांधा, जोगीपुर, खुरदूर सहित लगभग 20 गांवों में पर्यावरण प्रदूषण की गंभीर संभावना है।

उन्होंने आशंका जताई कि कोल वाशरी से निकलने वाली धूल, दूषित जल एवं रासायनिक अपशिष्ट के कारण आसपास की कृषि भूमि, फसलें और जल स्रोत प्रभावित होंगे। साथ ही, ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है। यह परियोजना भैसाझार डेम, चापी नाला, घोंघा जलाशय, अरपा नदी और सल्का बैराज जैसे जल स्रोतों से मात्र 2 से 5 किलोमीटर की दूरी पर प्रस्तावित है, जिससे पूरे क्षेत्र के जल जीवन पर संकट उत्पन्न हो सकता है।

श्रीवास्तव ने यह भी उल्लेख किया कि परियोजना स्थल के निकट लोरमी आरएफ, कुआंजति आरएफ, रतनपुर पीएफ, बेलगहना पीएफ एवं शिवतराई पीएफ जैसे वन क्षेत्र स्थित हैं, जबकि अचानकमार टाइगर रिजर्व लगभग 10 किलोमीटर दूरी पर है। ऐसे में वन्यजीवों—जैसे शेर, तेंदुआ, भालू, हिरण और जंगली भैंसा—पर भी प्रदूषण का प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

इसके अतिरिक्त, प्रस्तावित कोल वाशरी द्वारा प्रतिदिन लगभग 490 केएलडी भूजल के उपयोग की बात कही गई है, जिससे आसपास के गांवों में पेयजल एवं सिंचाई के लिए जल संकट गहरा सकता है।

विधायक ने यह मुद्दा भी उठाया कि संबंधित क्षेत्र पेसा अधिनियम के अंतर्गत आता है, जहां किसी भी औद्योगिक गतिविधि के लिए ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिना वैध सहमति या भ्रामक तरीके से सहमति प्राप्त कर परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है।

विधानसभा में उठे इस मुद्दे के बाद अब शासन स्तर पर परियोजना के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों की जांच तथा आवश्यक कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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