
“AK-47 समेत 18 हथियार और 12 लाख नकद बरामद,7 महिला माओवादी भी शामिल, पुनर्वास योजना के तहत मिलेंगी सुविधाएं,2024 से अब तक 2756 माओवादी छोड़ चुके हैं हिंसा का रास्ता”

जगदलपुर। बस्तर संभाग मुख्यालय स्थित शौर्य भवन पुलिस कोऑर्डिनेशन सेंटर लालबाग में बुधवार को पूना मारगेम -पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल के अंतर्गत एक महत्वपूर्ण आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZC) से जुड़े कुल 18 माओवादी कैडरों (07 महिला सहित) ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
कार्यक्रम पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़ अरुण देव गौतम अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नक्सल ऑपरेशन विवेकानंद, बीएसएफ के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक नामग्याल, बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी., सीआरपीएफ के पुलिस महानिरीक्षक शालीन, बस्तर पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में संपन्न हुआ।
87 लाख रुपये के इनामी 18 माओवादी कैडरों का आत्मसमर्पण

आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों में संगठन के विभिन्न स्तरों के पदाधिकारी शामिल हैं, जिनमें 01 स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य (SZCM), 03 डिवीजनल कमेटी सदस्य (DVCM), 04 PPCM, 02 ACM, 02 एलओएस सदस्य तथा 06 पार्टी सदस्य शामिल हैं। इन सभी पर कुल 87 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वरिष्ठ माओवादी नेता एसजेडसीएम पापाराव सहित अन्य कैडरों का आत्मसमर्पण नक्सल विरोधी अभियान की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
18 घातक हथियार एवं 12 लाख नकद बरामद
आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों द्वारा 08 नग AK-47, 01 SLR, 01 इंसास रायफल, 04 नग .303 रायफल, 01 नग 9 एमएम पिस्टल, 02 नग सिंगल शॉट तथा 01 BGL लॉन्चर सहित कुल 18 घातक हथियार एवं 12 लाख रुपये नकद सुरक्षा बलों को सौंपे गए। इससे माओवादी संगठन की सैन्य क्षमता को गंभीर आघात पहुंचा है।
2024 से अब तक 2756 माओवादी कर चुके हैं पुनर्वास
उल्लेखनीय है कि बस्तर संभाग में 01 जनवरी 2024 से 25 मार्च 2026 तक कुल 2756 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर पुनर्वास का मार्ग अपना चुके हैं, जो क्षेत्र में शांति एवं विकास की दिशा में सकारात्मक संकेत है।
प्रमुख कैडरों में पापाराव, अनिल ताती व प्रकाश माड़वी शामिल
आत्मसमर्पण करने वालों में एसजेडसीएम पापाराव (25 लाख इनामी), डीवीसीएम अनिल ताती (08 लाख) एवं डीवीसीएम प्रकाश माड़वी जैसे वरिष्ठ माओवादी शामिल हैं। इन सभी ने संगठन की औचित्यहीनता को स्वीकार करते हुए मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।
पुनर्वास नीति के तहत मिलेंगी सुविधाएं
राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सभी कैडरों को आर्थिक सहायता, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा एवं रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। साथ ही उनके सुरक्षित एवं सम्मानजनक पुनर्वास के लिए प्रशासन द्वारा निरंतर सहयोग किया जाएगा।
शांति और विकास को मिलेगा बढ़ावा
इस सामूहिक आत्मसमर्पण से माओवादी संगठन की संरचना को बड़ा झटका लगा है। साथ ही क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं अन्य विकास कार्यों को गति मिलने की संभावना है।
पुलिस प्रशासन ने शेष माओवादी कैडरों से भी अपील की है कि वे हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटें। शासन उनके सुरक्षित और उज्ज्वल भविष्य के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।
प्रधान संपादक


