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March 23, 2026 6:17 pm

30 लाख का भत्ता, 200 संशोधन और अनुकंपा नियुक्ति में गड़बड़ी-शिक्षा विभाग पर संगठित घोटाले के आरोप

छत्तीसगढ़।बिलासपुर जिला शिक्षा विभाग में वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के उल्लंघन के गंभीर आरोप सामने आए हैं। युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अंकित गौरहा ने प्रदेश के प्रमुख सचिव को लिखित शिकायत सौंपकर प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे और स्थापना शाखा के जूनियर ऑडिटर सुनील यादव के खिलाफ जांच की मांग की है।शिकायत में वित्तीय गबन, अनुकंपा नियुक्ति में फर्जीवाड़ा, युक्तियुक्तकरण में नियमों की अनदेखी और प्रशासनिक निर्णयों में पारदर्शिता की कमी जैसे कई बिंदु शामिल हैं।

भत्तों के नाम पर 30 लाख रुपये के भुगतान का आरोप

शिकायत के अनुसार, कोटा विकासखंड में पदस्थ रहने के दौरान सितंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच एक कर्मचारी को “अन्य भत्ता” और “वर्दी धुलाई भत्ता” के नाम पर लगभग 30 लाख रुपये का भुगतान किया गया। आरोप है कि हर महीने 4 से 4.5 लाख रुपये तक की राशि एक ही कर्मचारी को दी गई, जो सामान्य वेतन ढांचे से कहीं अधिक है।इस मामले में आहरण एवं संवितरण अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।

कलेक्टर के निर्देश के बावजूद कार्रवाई नहीं

मामला कलेक्टर की समय-सीमा बैठकों में उठने और थाना कोटा में अपराध दर्ज होने के बावजूद संबंधित अधिकारी पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इसे प्रशासनिक उदासीनता बताया है।

अनियमितताओं को छिपाने का आरोप

शिकायत में कहा गया है कि कथित गड़बड़ियों को छिपाने के लिए अधीनस्थ कर्मचारियों को निलंबित किया गया, जबकि वास्तविक जिम्मेदारी उच्च अधिकारियों की बताई गई है। साथ ही, मासिक व्यय पत्रक और बजट दस्तावेजों में हेरफेर कर वित्तीय अनियमितताओं को छुपाने का भी आरोप है।

पुराने मामलों में भी कार्रवाई का अभाव

शिकायत में उल्लेख किया गया है कि पूर्व में सामने आए कुछ मामलों में निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई, लेकिन संबंधित वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया। यहां तक कि शिकायतों के बावजूद उन्हें पदोन्नति दिए जाने का भी आरोप है।

अनुकंपा नियुक्ति और युक्तियुक्तकरण में अनियमितताएं

अनुकंपा नियुक्तियों में पात्रों की जगह अपात्र व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। वहीं, युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया में जिला और विकासखंड स्तरीय समितियों को दरकिनार कर करीब 200 प्रकरणों में संशोधन किए जाने की बात कही गई है।इन संशोधनों में दस्तावेजी प्रक्रिया और अनुमोदन का अभाव बताया गया है।

जांच प्रभावित होने की आशंका, निलंबन की मांग

शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि संबंधित अधिकारी पद पर बने रहने से जांच प्रभावित हो सकती है। इसलिए उन्हें तत्काल निलंबित कर स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।साथ ही, जूनियर ऑडिटर के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई है।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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