जगदलपुर, 22 मार्च। बस्तर की ऐतिहासिक धरती पर रविवार को खेल और संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। “बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026” में जहां एक ओर धावकों ने अपनी रफ्तार का दम दिखाया, वहीं दूसरी ओर पारंपरिक लोकनृत्यों और मांदर की थाप ने पूरे आयोजन को उत्सव में बदल दिया।
मैराथन की शुरुआत ऐतिहासिक लाल बाग से हुई और 42 किलोमीटर लंबे मार्ग में विभिन्न स्थानों पर धावकों का स्वागत पारंपरिक नृत्य प्रस्तुतियों से किया गया। चांदनी चौक पर नेगानार के झाड़ा सिरहा नृत्य और राम मंदिर क्षेत्र में छिंदावाड़ा के धुरवा नृत्य ने प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया। पूरे मार्ग में अलग-अलग अंचलों के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से आयोजन को जीवंत बनाए रखा।
फुल मैराथन में विदेशी धावकों का दबदबा

फुल मैराथन (42.195 किमी) के ओपन पुरुष वर्ग में इथियोपिया के टेडेजे किनेटो वाशे ने 2:26:49 घंटे का समय लेकर प्रथम स्थान प्राप्त किया। महिला वर्ग में मेसेरेट मेंगिस्तु ने 2:41:50 घंटे के साथ जीत दर्ज की।
स्थानीय प्रतिभाओं ने भी शानदार प्रदर्शन किया। बस्तर पुरुष वर्ग में संजय कोर्राम ने 2:31:50 घंटे में दौड़ पूरी कर पहला स्थान हासिल किया, जबकि महिला वर्ग में कुसुम शार्दुल ने 3:18:43 घंटे के साथ बाजी मारी।
हाफ और 10 किमी में भी दिखा रोमांच

हाफ मैराथन (21 किमी) के पुरुष वर्ग में मोनू कुमार (1:05:31) विजेता रहे, जबकि महिला वर्ग में त्सेहे देसाले (1:17:40) ने पहला स्थान प्राप्त किया। स्थानीय वर्ग में भावेश कुमार और कुमली पोयाम ने जीत दर्ज की।
10 किमी दौड़ में बबलू टूडू (00:28:43) और पूनम (00:34:56) ने क्रमशः पुरुष और महिला वर्ग में पहला स्थान हासिल किया। जूनियर वर्ग में सागर और लावण्या तथा सब-जूनियर वर्ग में मोहित धोंडू और अंजलि गुप्ता विजेता रहे।
दिव्यांग पीयूष ने पेश की प्रेरणा

मैराथन के दौरान दंतेवाड़ा के कृषि महाविद्यालय के प्राचार्य पीयूष कुमार ने अपने अदम्य साहस से सभी को प्रेरित किया। एक पैर गंवाने के बावजूद उन्होंने कृत्रिम अंग के सहारे 5 किमी दौड़ पूरी की।
इसी तरह 5 वर्षीय वंश ने नन्हे कदमों से सबका दिल जीता, जबकि 72 वर्षीय गुरमील सिंह ने सबसे वरिष्ठ प्रतिभागी के रूप में दौड़ पूरी कर मिसाल पेश की। हरियाणा के 60 वर्षीय किशन लाल और हैदराबाद के पूर्व सैनिक मदन गोपाल ने भी अपनी भागीदारी से फिटनेस का संदेश दिया।
समापन समारोह में हुआ सम्मान

चित्रकोट में आयोजित समापन समारोह में विजेताओं को प्रदेश के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, बस्तर सांसद महेश कश्यप और अन्य जनप्रतिनिधियों ने सम्मानित किया।
खेल के साथ संस्कृति का संदेश
“बस्तर हेरिटेज मैराथन 2026” केवल एक खेल आयोजन नहीं रहा, बल्कि बस्तर की समृद्ध संस्कृति, परंपरा और उभरती खेल प्रतिभाओं का प्रतीक बनकर उभरा। इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि बस्तर अब खेल और सांस्कृतिक पहचान के साथ वैश्विक मंच पर अपनी अलग छाप छोड़ रहा है।
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