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March 22, 2026 3:15 pm

पुलिस अब दरवाजे पर: एसएसपी पहुंचे अंबा कॉलोनी, जनसंवाद से भरोसे की नई शुरुआत

“एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि जिले में बीट पुलिसिंग व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक क्षेत्र में पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय की गई है, नियमित गश्त बढ़ाई जा रही है और स्थानीय नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है”

छत्तीसगढ़। बिलासपुर सरकंडा थाना क्षेत्र स्थित अंबा कॉलोनी में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम ने पुलिस और आम नागरिकों के बीच दूरी कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल का संकेत दिया। यह सिर्फ एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि भरोसे के नए रिश्ते की शुरुआत के रूप में सामने आया।

कॉलोनी परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में स्थानीय लोग बड़ी संख्या में जुटे। वातावरण में उत्सुकता थी- क्योंकि इस बार पुलिस थाने में नहीं, बल्कि लोगों के बीच पहुंची थी।

डर से भरोसे तक का सफर

स्थानीय निवासी चरणजीत सिंह गंभीर ने बताया कि पहले क्षेत्र में छोटी-छोटी चोरी की घटनाएं होती थीं, लेकिन शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से लोगों में निराशा थी। उन्होंने कहा कि रात में बाहर निकलने में भी असुरक्षा महसूस होती थी।

वहीं, कॉलोनी की महिलाओं ने भी चिंता जताई कि शाम के बाद बच्चों को अकेले बाहर भेजना सुरक्षित नहीं लगता। नशाखोरी और असामाजिक तत्वों की गतिविधियों ने लोगों में भय का माहौल बना रखा था। यह स्थिति सिर्फ अंबा कॉलोनी तक सीमित नहीं, बल्कि शहर के कई इलाकों की आम समस्या रही है।

जब अधिकारियों ने सुनी हर आवाज

इन्हीं समस्याओं के बीच आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम में डीआईजी एवं एसएसपी रजनेश सिंह स्वयं पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। कार्यक्रम में मंच भले ही छोटा था, लेकिन मुद्दे गंभीर थे।

स्थानीय लोगों ने चोरी, ट्रैफिक अव्यवस्था और नशाखोरी जैसे मुद्दे उठाए। पुलिस अधिकारियों ने न केवल इन समस्याओं को सुना, बल्कि कई मामलों में मौके पर ही आवश्यक निर्देश भी दिए।

बीट पुलिसिंग से जमीनी बदलाव की तैयारी

एसएसपी रजनेश सिंह ने बताया कि जिले में बीट पुलिसिंग व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। इसके तहत प्रत्येक क्षेत्र में पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी तय की गई है, नियमित गश्त बढ़ाई जा रही है और स्थानीय नागरिकों से सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है।यही नहीं बीट सिस्टम पर लोगों से फीडबैक लिया जा रहा है। बीट कर्मचारी ही पुलिस का पहला संपर्क व्यक्ति होता है। किसी भी समस्या पर उन्हें तुरंत सूचित किया जा सकता है। इसके अलावा डायल 112 और पुलिस पेट्रोलिंग जैसी अन्य व्यवस्थाएं भी उपलब्ध हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब फोकस सिर्फ बड़ी घटनाओं पर नहीं, बल्कि छोटी गतिविधियों पर भी रहेगा, ताकि अपराध को होने से पहले ही रोका जा सके।

सुरक्षा व्यवस्था में क्या बदलेगा?

• पहले शिकायत के बाद कार्रवाई होती थी, अब पहले से निगरानी पर जोर

• पुलिस और जनता के बीच दूरी थी, अब सीधा संवाद बढ़ाया जा रहा है

• सूचना तंत्र कमजोर था, अब स्थानीय सहयोग से मजबूत किया जा रहा है

• मोहल्लों में पुलिस की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जा रही है

सख्ती और संवेदनशीलता का संतुलन

पुलिस की इस पहल की विशेषता यह है कि इसमें अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ आम नागरिकों के प्रति संवेदनशील व्यवहार पर भी जोर दिया जा रहा है। हिस्ट्रीशीटर और संदिग्ध व्यक्तियों पर नजर रखी जा रही है, वहीं महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।

भरोसे की नई कहानी

कार्यक्रम के समापन के बाद स्थानीय लोगों के चेहरे पर संतोष नजर आया। चरणजीत सिंह गंभीर ने कहा कि यदि पुलिस इसी तरह नियमित रूप से लोगों के बीच आती रही, तो नागरिकों में सुरक्षा और भरोसे की भावना और मजबूत होगी।

बदलती पुलिसिंग, बदलता शहर

अंबा कॉलोनी में हुआ यह जनसंवाद कार्यक्रम इस बात का संकेत है कि पुलिस व्यवस्था अब केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि समाज के साथ सहभागिता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।यदि यह प्रयास निरंतर जारी रहा, तो आने वाले समय में बिलासपुर न केवल एक विकसित शहर, बल्कि एक सुरक्षित और सहभागी समाज के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर सकता है।

क्या कहा आईजी रेंज ने

आईजी बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग ने कहा कि अपराध नियंत्रण में जनता की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।

रवि शुक्ला
रवि शुक्ला

प्रधान संपादक

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