रायपुर, 10 मार्च।चिरायु योजना के तहत उन परिवारों को निःशुल्क उपचार का लाभ दिया जा रहा है जो आयुष्मान भारत योजना के लिए पात्र नहीं हैं। इस योजना के अंतर्गत अंत्योदय परिवारों और दिव्यांगजनों को भी मुफ्त चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
बस्तर जिले के सुदूर वनांचल स्थित तारागांव में रहने वाले छह वर्षीय विक्रम कश्यप के जीवन में भी इस योजना ने नई उम्मीद जगाई है। मजदूर परिवार में जन्मे विक्रम को जन्मजात कटे होंठ और तालु (क्लेफ्ट लिप एंड पैलेट) की समस्या थी। इसके कारण उसे भोजन करने और स्पष्ट बोलने में काफी कठिनाई होती थी।
गांव में अक्सर झिझक और हीन भावना से घिरा रहने वाला विक्रम अपना चेहरा छिपाकर रहता था और अन्य बच्चों की तरह खुलकर हंस नहीं पाता था। इसी दौरान शासन की चिरायु टीम आंगनवाड़ी जांच के लिए तारागांव पहुंची। जांच के दौरान टीम ने विक्रम की समस्या की पहचान की और उसके पिता नरसिंग कश्यप को बेहतर उपचार का भरोसा दिलाया।

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में विक्रम को उपचार के लिए रायपुर के मेडिशाइन अस्पताल ले जाया गया। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने उसका सफल ऑपरेशन किया, जिससे उसके फटे होंठ और तालु का उपचार हो गया।
ऑपरेशन के कुछ सप्ताह बाद जब विक्रम अपने गांव लौटा तो उसके चेहरे पर आत्मविश्वास झलक रहा था। अब वह स्पष्ट बोल पाता है और सामान्य बच्चों की तरह हंस-खेल रहा है।
विक्रम के पिता नरसिंग कश्यप ने बताया कि चिरायु योजना उनके बेटे के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल तथा स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।
यह कहानी दर्शाती है कि शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और उज्ज्वल भविष्य का अवसर मिल सकता है।
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